Atmadharma magazine - Ank 209
(Year 18 - Vir Nirvana Samvat 2487, A.D. 1961)
(Devanagari transliteration).

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: : आत्मधर्म : २०९ :
ब्रह्मचर्य प्रतिज्ञा
जामनगरमां जिनेन्द्र पंचकल्याणक महोत्सव वखते जामनगर दिगम्बर जैन
मुमुक्षु मंडळना उपप्रमुख श्री खेतशीभाईना सुपुत्री श्री ललीताबहेन B. A. जे
बाल ब्रह्मचारी छे. उ. व. २३ तेमणे पू. गुरुदेव समक्ष आजीवन ब्रह्मचर्य प्रतिज्ञा
अंगीकार करी छे बदल धन्यवाद आ बहेनने धार्मिक तत्त्वज्ञाननो घणो सारो
अभ्यास छे, उपरांत शान्त, वैराग्यवंत छे.
(ता. १७–७–६१ महा सुद १ मंगळवार)
जामनगरमां जिनेन्द्र पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सवमां भगवानना दिक्षा
कल्याणक प्रसंगे जामनगरना श्री नवलचंद छगनलाल महेता तथा श्री रतीभाई
अमरचंद बावरिया बेउ भाईओए सजोडे आजीवन ब्रह्मचर्य प्रतिज्ञा पूज्य गुरुदेव
समक्ष अंगीकार करी ते बदल धन्यवाद.
* * * * *
पोरबंदरना समाचार
पू. गुरुदेव महा सुद १४ ना रोज पोरंबदर पधारतां त्यां उत्साहभेर
स्वागत थयुं. महा वद त्रीजना रोज पू. गुरुदेवना हस्ते श्री बाहुबली भगवानने
जिनमंदिरनी उपरनी वेदीमां बिराजमान कर्या हता तथा तेना हर्षोपलक्षमां श्री
जिनेन्द्रदेवनी रथयात्रा काढवामां आवी हती. अने नवकारशी जमण (समस्त
जैनोमां जमण) करवामां आव्युं हतुं.
शेठश्री नानजी काळीदासना भारतमंदिर तथा गुरुकूळनुं अवलोकन करवा
गुरुदेव पधार्या हता, अने त्यां गुरुकूळनी विद्यार्थी बाळाओने अनुलक्षीने दशेक
मिनिट बालोपयोगी उपदेश आप्यो हतो.
वैराग्य समाचार
गुजरवदी निवासी स्व. उजमशीभाई त्रिकमलालना सुपुत्र भाई हरिलाल
(ब्र. चंदुभाईना मामाना पुत्र) नुं लगभग २९ वर्षनी नानी वयमां कमळीनी टूंकी
बीमारीथी ता. ६–२–६१ ना रोज मुंबईमां अवसान थयुं छे. भाई हरिलाल
शांतस्वभावी, नम्र, धर्मजिज्ञासु तथा पू. गुरुदेव प्रत्ये भक्तिवाळा हता. मुंबईमां
मंडळना वांचननो पण लाभ लेता. सोनगढ आवीने पण पू. गुरुदेवनी अमृतमयी
वाणीनो घणी वार लाभ लेता. आवो दुर्लभ मनुष्यभव तथा साचा देव–गुरु–
धर्मनो योग पामीने पण आटली अल्प वयमां देहावलय थवो ते खरेखर वैराग्य
तथा संसारनी क्षणिकतानो बोधदायक प्रसंग छे. भाई हरिलालनो आत्मा साचा
देव–गुरु धर्मनो योग पामी, धर्मरुचि वधारी, जन्म–मरण–रहित आत्मानापरम
शांतपदने शीघ्र पामे एवी श्री जिनेन्द्रदेव पासे प्रार्थना करीए छीए तथा तेमना
कुटुंबीजनो प्रत्ये समवेदना प्रगट करीए छीए.