Atmadharma magazine - Ank 088
(Year 8 - Vir Nirvana Samvat 2477, A.D. 1951)
(Devanagari transliteration).

< Previous Page   Next Page >


PDF/HTML Page 3 of 13

background image
क्यारे निहाळुं सीमंधर नाथने रे...!

विदेहक्षेत्र रळियामणुं रे लाल,
मोक्षपुरीना ज्यां पाक छे रे लाल,
क्यारे निहाळुं मारा नाथने रे लाल,
धन्य निहाळुं सीमंधरनाथने रे लाल..
पुष्कलावती विजय अति सोहती रे लाल,
पुंडरगीरी देवपुरी समी रे लाल...क्यारे...
सीमंधरनाथ त्यां जनमीया रे लाल,
श्रेयांसराय मात सत्यवती रे लाल...क्यारे...
ईन्द्ररचित पुंडरगीरी रे लाल,
ज्यां जन्मकल्याणक सोहता रे लाल...क्यारे...
सीमंधरनाथे तप आदर्या रे लाल,
तपकल्याणक विदेहमां रे लाल..क्यारे..
उग्र तपोधन जिन थया रे लाल;
केवळज्ञान प्रगटावीया रे लाल...क्यारे...
पांचसो धनुषे नाथ सोहता रे लाल,
समोसरण मांहि बिराजता रे लाल...क्यारे...
मुख पुनमकेरो चंद छे रे लाल,
देहदेदारे शांतरस झरे रे लाल...क्यारे..
गुण–पर्यायमांहि राचता रे लाल,
अडोल अकंप चैतन्य रसे रे लाल...क्यारे...
निर्द्वंद अने निराहार छो रे लाल,
वळी अपुनर्भव नाथ छो रे लाल,
क्यारे निहाळुं मारा नाथने रे लाल,
धन्य निहाळुं सीमंधरनाथने रे लाल.
तीर्थकृत् भगवान छो रे लाल,
पुरुषार्थ अने सिद्धार्थ छो रे लाल...क्यारे...
अंर्तबाहिर लक्ष्मीथीरे लाल,
सुशोभित जगवंद्य छो रे लाल...क्यारे...
सीमंधरनाथ क्यारे देखशुं रे लाल,
आतममां लवलीन थशुं रे लाल...क्यारे...
सेवकने दर्शन आश छे रे लाल,
जिननाथ मळ्‌ये उल्लास छे रे लाल..क्यारे...
प्रभु वाट जुओ केम आवडी रे लाल,
मुज रगे रगे भक्ति ताहरी रे लाल...क्यारे...
विरह पड्या भरतक्षेत्रमां रे लाल,
दूर रह्या अमे विदेहथी रे लाल...क्यारे...
प्रभु क्षमा करो अम बाळने रे लाल,
झट चरणे ग्रहो जगनाथ छो रे लाल,
क्यारे निहाळुं सीमंधरनाथने रे लाल,
धन्य निहाळुं सीमंधर नाथने रे लाल.
महोत्सव
आजथी दस वर्ष पहेलांं, सोनगढना जिनमंदिरमां भगवान श्री सीमंधर प्रभुजी वगेरे भगवंतोनी,
अति उल्लास अने भक्तिपूर्वक प्रतिष्ठा थई...आ फागण सुद बीजे ए पवित्र प्रसंगने बे युग पूरा थईने त्रीजा
युगनो प्रारंभ थशे–१० वर्ष पूरा थईने ११ मुं वर्ष शरू थशे. दस वर्ष पहेलांंना ए धन्य प्रसंगनो उल्लास
मुमुक्षुभक्तोना हृदयमां आजे पण एवो ने एवो ताजो छे. दस वर्ष पूर्णाहुतिनो ने त्रीजा युगना प्रारंभनो ए
प्रसंग खास उल्लासपूर्वक ऊजववानुं नक्की थयुं छे. ए माटे माह वद ९ ने शुक्रवार ता. २–३–प१ थी फागण सुद
२ ने शुक्रवार ता. ९–३–प१ सुधीना आठ दिवसो ‘अठ्ठाई महोत्सव’ तरीके नक्की कर्या छे. ए प्रसंगे अजमेरनी
भजनमंडळी आववा पण संभव छे.
वळी, फागण सुद एकमना रोज ‘भगवान श्री कुंदकुंद प्रवचन–मंडप’ ना उद्घाटनना चार वर्ष पूरा
थईने पंचम वर्ष प्रारंभ थाय छे.
साथे साथे, आ महोत्सव दरम्यान, बहेनोना स्वाध्यायादि माटे नवा बंधायेल होल– ‘भगवान श्री
कुंदकुंदजैनश्राविकाशाळ’ना उद्घाटननो महोत्सव थशे.