
तुम हो वारस वीरका... श्री जिनवरका नंद,
अंतर आतम साधना होगा परमानंद. (र)
मात झुलाती बालको देती है आशीष,
सून लो बच्चा प्रेमसे जिनवाणीका सार,
स्वानुभूतिसे पावना भवसागरका पार. (४)
परमेष्ठीके प्रसादसे तू करना आतमज्ञान,
Atmadharma magazine - Ank 359
(Year 30 - Vir Nirvana Samvat 2499, A.D. 1973)
(Devanagari transliteration).
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