Atmadharma magazine - Ank 359
(Year 30 - Vir Nirvana Samvat 2499, A.D. 1973)
(Devanagari transliteration).

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: भाद्रपद र४९९ : आत्मधर्म : ३७ :
बन जाना भगवान... [ब्र. ह. जैन]
[हाला... हाला...]
एक संस्कारी जैनमाता, पोताना
बाळकने नीचेनुं हालरडुं संभळावती’ ती–
पलनाके ललना सुनो! हंसके मांके वैन,
शुद्ध–निरंजन–बुद्ध तुम, क्यों रोते बेचैन! (१)
तुम हो वारस वीरका... श्री जिनवरका नंद,
अंतर आतम साधना होगा परमानंद. (र)
मात झुलाती बालको देती है आशीष,
चलकर वीरके पंथपर बन जाना जगदीश. (३)
सून लो बच्चा प्रेमसे जिनवाणीका सार,
स्वानुभूतिसे पावना भवसागरका पार. (४)
परमेष्ठीके प्रसादसे तू करना आतमज्ञान,
मोह तोड संसारका... बन जाना भगवान. (प)