Benshreena Vachanamrut-Gujarati (Devanagari transliteration). Bol: 410.

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बहेनश्रीनां वचनामृत
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छे. विकट प्रसंगे ते निज शुद्धात्मानुं शरण विशेष ग्रहे छे. मरणादिसमये धर्मी जीव शाश्वत एवा निज- सुखसरोवरमां विशेष विशेष डूबकी मारी जाय छे ज्यां रोग नथी, वेदना नथी, मरण नथी, शान्तिनो अखूट निधि छे. ते शान्तिपूर्वक देह छोडे छे. तेनुं जीवन सफळ छे.

तुं मरणनो समय आव्या पहेलां चेती जा, सावधान था, सदाय शरणभूतविपत्तिसमये विशेष शरणभूत थनारएवा शुद्धात्मद्रव्यने अनुभववानो उद्यम कर. ४०९.

जेणे आत्माना मूळ अस्तित्वने पकड्युं नथी, ‘पोते शाश्वत तत्त्व छे, अनंत सुखथी भरपूर छे’ एवो अनुभव करीने शुद्ध परिणतिनी धारा प्रगटावी नथी, तेणे भले सांसारिक इन्द्रियसुखोने नाशवंत अने भविष्यमां दुःख देनारां जाणी तजी दीधां होय अने बाह्य मुनिपणुं ग्रहण कर्युं होय, भले ते दुर्धर तप करतो होय अने उपसर्ग-परिषहमां अडग रहेतो होय, तोपण तेने ते बधुं निर्वाणनुं कारण थतुं नथी, स्वर्गनुं कारण थाय छे; कारण के तेने शुद्ध परिणमन बिलकुल वर्ततुं नथी, मात्र शुभ परिणाम जअने ते पण उपादेयबुद्धिएवर्ते छे. ते