Benshreena Vachanamrut-Gujarati (Devanagari transliteration). Bol: 419.

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बहेनश्रीनां वचनामृत
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भेगा थता नथी, तो पछी जे सिद्धपणे परिणम्या ते असिद्धपणे क्यांथी परिणमे? सिद्धत्वपरिणमन प्रवाहरूपे सादिअनंत छे. सिद्धभगवान सादि-अनंत काळ प्रतिसमय पूर्णरूपे परिणम्या करे छे. जोके सिद्ध- भगवानने ज्ञान-आनंदादि सर्व गुणरत्नोमां चमक ऊठ्या ज करे छेउत्पादव्यय थया ज करे छे, तोपण ते सर्व गुणो परिणमनमां पण सदा तेवा ने तेवा ज परिपूर्ण रहे छे. स्वभाव अद्भुत छे. ४१८.

प्रश्नःअनंत काळना दुखियारा अमे; अमारुं आ दुःख केम मटे?

उत्तरःहुं ज्ञायक छुं, हुं ज्ञायक छुं, विभावथी जुदो हुं ज्ञायक छुं’ ए रस्ते जवाथी दुःख टळशे अने सुखनी घडी आवशे. ज्ञायकनी प्रतीति थाय अने विभावनी रुचि छूटेएवा प्रयत्ननी पाछळ विकल्प तूटशे अने सुखनी घडी आवशे. ‘हुं ज्ञायक छुं’ एम भले पहेलां उपलकपणे कर, पछी ऊंडाणथी कर, पण गमे तेम करीने ए रस्ते जा. शुभाशुभ भावथी जुदा ज्ञायकनो ज्ञायकपणे अभ्यास करीने ज्ञायकनी प्रतीति द्रढ करवी, ज्ञायकने ऊंडाणथी प्राप्त करवो, ते ज सादि-अनंत सुख प्राप्त करवानो उपाय छे. आत्मा