Benshreena Vachanamrut-Gujarati (Devanagari transliteration). Bol: 425-426.

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बहेनश्रीनां वचनामृत
१६९

छे, व्यक्तिमां अशुद्धता आवी छे. ४२४.

प्रश्नजिज्ञासु जीव तत्त्वने यथार्थ धारवा छतां केवा प्रकारे अटकी जाय छे?

उत्तरतत्त्वने धारवा छतां जगतना कोईक पदार्थोमां ऊंडे ऊंडे सुखनी कल्पना रही जाय अथवा शुभ परिणाममां आश्रयबुद्धि रही जायइत्यादि प्रकारे ते जीव अटकी जाय छे. बाकी जे खास जिज्ञासुआत्मार्थी होय अने जेने खास प्रकारनी पात्रता प्रगटी होय ते तो क्यांय अटकतो ज नथी, अने ते जीवने ज्ञाननी कोई भूल रही गई होय तो ते पण स्वभावनी लगनीना बळे नीकळी जाय छे; अंतरनी खास प्रकारनी पात्रतावाळो जीव क्यांय अटक्या विना पोताना आत्माने प्राप्त करी ले छे. ४२५.

प्रश्नमुमुक्षुए सम्यग्दर्शन प्राप्त करवा माटे शुं करवुं?

उत्तरअनादिकाळथी आत्माए पोतानुं स्वरूप छोड्युं नथी, पण भ्रान्तिने लीधे ‘छोडी दीधुं छे एम तेने भास्युं छे. अनादिकाळथी द्रव्य तो शुद्धताथी