Chha Dhala-Gujarati (Devanagari transliteration). Gatha: 3 (Dhal 6).

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१६६ ][ छ ढाळा
करवावाळा, सांभळतां सुख आपनारा, सर्व प्रकारनी शंकाओने
दूर करनारा अने मिथ्यात्व (विपरीतता के संदेह) रूपी रोगनो
नाश करनार एवा अमृत वचनो नीकळे छे. ए प्रमाणे समितिरूप
बोलवानो विकल्प मुनिने ऊठे छे ते बीजी भाषा समिति छे.
नोंध
उपर भावार्थमां वाक्य बदलावाथी क्रमे करीने परिग्रहत्याग
महाव्रत तथा इर्यासमिति अने भाषासमितिनुं लक्षण थई शके.
प्रश्नसाची समिति कोने कहे छे?
उत्तरपर जीवोनी रक्षा अर्थे यत्नाचार प्रवृत्तिने
अज्ञानी जीव समिति माने छे, पण हिंसाना परिणामोथी तो
पापबंध थाय छे. जो रक्षाना परिणामोथी संवर कहेशो तो
पुण्यबंधनुं कारण शुं ठरशे?
वळी मुनि एषणा समितिमां दोष टाळे छे त्यां रक्षानुं
प्रयोजन नथी, माटे रक्षाने अर्थे ज समिति नथी. तो समिति केवी
रीते होय? मुनिने किंचित
् राग थतां गमनादि क्रिया थाय छे,
त्यां ते क्रियाओमां अति आसक्तिना अभावथी प्रमादरूप प्रवृत्ति
थती नथी, तथा बीजा जीवोने दुःखी करी पोतानुं गमनादि
प्रयोजन साधता नथी; तेथी तेमनाथी स्वयं दया पळाय छे.
प्रमाणे साची समिति छे.* (मोक्षमार्ग प्र पृ.-२३२)
एषणा, आदान-निक्षेपण अने प्रतिÌापन समिति
छ्यालीस दोष विना सुकुल, श्रावकतनें घर अशनको,
लैं तप बढावन हेतु, नहिं तन पोषते तजि रसनको;
*इर्या भाषा एषणा, पुनि क्षेपण आदान;
प्रतिष्ठापना जुत क्रिया; पांचों समिति विधान.