Ishtopdesh-Gujarati (Devanagari transliteration).

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४६ ]
इष्टोपदेश
[ भगवानश्रीकुंदकुंद-
टीकावर्तते किं तद्धनं किं विशिष्टं ? इष्टमभिमतं कथं, सुतरां अतिशयेन
कस्माज्जीवितात्प्राणेभ्यः केषां ? धनिनां, किं कुर्वंतां ? वाञ्छतां कं, निर्गमं अतिशयेन गमनं
कस्य, कालस्य किं विशिष्टं ? आयुरित्यादि आयुः क्षयस्य वृद्धयुत्कर्षस्य च कालान्तरवर्द्धनस्य
कारणम् अयमर्थो, धनिनां तथा जीवितव्यं नेष्टं यथा धनं कथमन्यथा जीवितक्षयकारणमपि
धनवृद्धिहेतुं कालनिर्गमं वाञ्छन्ति अतो ‘धिग्धनम्’ एवंविधव्यामोहहेतुत्वाद्
विशदार्थमतलब यह है कि धनियोंको अपना जीवन उतना इष्ट नहीं, जितना
कि धन धनी चाहता है कि जितना काल बीत जाएगा, उतनी ही ब्यातकी आमदानी बढ़
जाएगी वह यह ख्याल नहीं करता कि जितना काल बीत जाएगा उतनी ही मेरी आयु
(जीवन) घट जाएगी वह धनवृद्धिके ख्यालमें जीवन (आयु) विनाशकी ओर तनिक भी
लक्ष्य नहीं देता इसलिए मालूम होता है कि धनियोंको जीवन (प्राणों) की अपेक्षा धन
ज्यादा अच्छा लगता है इस प्रकारके व्यामोहका कारण होनेसे धनको धिक्कार है ।।१५।।
[वाञ्छतां धनिनाम् ] एम इच्छता धनिकोने [जीवितात् ] पोताना जीवन करतां [धनं ] धन
[सुतरां ] अतिशय (घणुं ज) [इष्टं ] (वहालुं) होय छे.
टीका :होय छे. शुं ते? धन. केवुं (होय छे)? इष्टप्रिय. केवी रीते? बहु
अतिशयपणे; कोनाथी? पोताना जीवननीप्राणथी, कोने (वहालुं होय छे)? धनिकोने.
शुं करता? इच्छता. शुं (इच्छता)? निर्गमननेअतिशयपणे गमनने, कोना (गमनने)?
कालना. केवा प्रकारनुं? आयु इत्यादि. (कालनुं गमन ते) आयुक्षयनुं कारण अने वृद्धि
(व्याज)ना उत्कर्षनुं कारण छे अर्थात् कालनुं अन्तर (व्याजनी आमदानीमां) वृद्धिनुं कारण
छे
एवो अर्थ छे. धनिकोने जेवुं धन इष्ट (वहालुं) होय छे तेवुं जीवितव्य इष्ट होतुं
नथी. नहि तो जीवनना क्षयनुं कारण होवा छतां धनवृद्धिना कारणरूप कालनिर्गमनने तेओ
केम इच्छे? माटे धन आवा व्यामोहनुं कारण होवाथी तेने धिक्कार हो!
भावार्थ :जेम जेम काल व्यतीत थाय छे तेम तेम आयु ओछुं थतुं जाय छे,
पण ते कालनुं अन्तर धनिकने व्याज वगेरेनी आमदानीमां वधारो करवानुं कारण बने छे,
तेथी तेने (कालगमनने) ते उत्कर्षनुं (आबादीनुं) कारण गणे छे.
जे धनिको लोभवश व्याज वगेरेनी कमाणी करवा माटे कालनुं निर्गमन इच्छे छे
तेओ पोताना जीवन करतां धनने वधारे वहालुं गणे छे, कारण के तेओ एम समजे छे
के कालना निर्गमनथी जेम दिवसो वधशे तेम व्याज वगेरे वधशे, पण तेटला दिवसो तेमना
आयुमांथी ओछा थशे तेनुं तेमने भान होतुं नथी. तेओ धनवृद्धिना लोभमां पोताना