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इष्टोपदेश
[ भगवानश्रीकुंदकुंद-
टीका — योऽवित्तो निर्धनः सन् संचिनोति सेवाकृष्यादिकर्मणोपार्जयति । किं ? तद्वित्तं
धनं । कस्मै ? त्यागाय पात्रदानदेवपूजाद्यर्थं त्यागायेत्यस्य देवपूजाद्युपलक्षणार्थत्वात् । कस्मै
त्यागः ? श्रेयसे अपूर्वपुण्याय पूर्वोपात्तपापक्षयाय । यस्य तु चक्रवर्त्यादेरिवायत्नेन धनं सिद्धयति
स तेन श्रयोऽर्थं पात्रदानादिकमपि करोत्विति भावः । स किं करोतीत्याह विलिम्पति विलेपनं
करोति । कोऽसौ ? सः । किं तत् ? स्वशरीरं । केन ? पङ्केन कर्दमेन । कथं कृत्वेत्याह
स्नास्यामीति । अयमर्थो, यथा कश्चिन्निर्मलाङ्गं स्नानं करिष्यामीति पङ्केन विलिम्पन्नसमीक्षकारी
अर्थ — जो निर्धन ऐसा ख्याल करे कि ‘पात्रदान, देवपूजा आदि करनेसे नवीन
पुण्यकी प्राप्ति और पूर्वोपार्जित पापकी हानि होगी, इसलिए पात्रदानादि करनेके लिए धन
कमाना चाहिए’। नौकरी, खेती आदि करके धन कमाता है, समझना चाहिए कि वह ‘स्नान
कर डालूँगा’ ऐसा विचार कर अपने शरीरको कीचड़से लिप्त करता है । खुलासा यह है
कि जैसे कोई आदमी अपने निर्मल अंगको ‘स्नान कर लूँगा’का ख्याल कर कीचड़से लिप्त
कर डाले, तो वह बेवकूफ ही गिना जाएगा । उसी तरह पापके द्वारा पहिले धन कमा
लिया जाय, पीछे पात्रदानादिके पुण्यसे उसे नष्ट कर डालूँगा, ऐसे ख्यालसे धनके कमानेमें
दान करवा माटे [वित्तं ] धननो [संचिनोति ] संचय करे छे, [सः ] ते [स्नास्यामि इति ] ‘स्नान
करी लईश’ एम समजी [स्वशरीरं ] पोताना शरीरने [पद्केन ] कादवथी [विलिम्पति ] खरडे
छे — (अर्थात् पोताना शरीरे कादव लपेडे छे.)
टीका : — जे पैसा विनानो एटले निर्धन छे, ते नोकरी, खेती आदि कार्यथी संचय
करे छे – उपार्जन करे छे. शुं ते (संचय करे छे)? वित्त एटले धन. शा माटे? त्याग माटे
अर्थात् पात्रदान, देवपूजा आदि (कार्य) माटे; कारण के ‘त्याग’ शब्दमां देव – पूजादिनो अर्थ
गर्भित छे. शाने माटे त्याग? कल्याण एटले अपूर्व पुण्यने माटे अने पूर्वोपार्जित पापना
क्षयने माटे.
जेने चक्रवर्ती आदिनी माफक यत्न विना धननी सिद्धि (प्राप्ति) होय छे, तो ते
धनथी पुण्यार्थे पात्रदानादिक करे – एवो भाव छे.
(शिष्य) पूछे छे – ‘ते शुं करे छे?’ लपेडे छे — खरडे छे (चोपडे छे). कोण ते?
ते (त्याग करनार). कोने (खरडे छे)? पोताना शरीरने. शा वडे? पंक वडे – कादव वडे.
(शिष्य) पूछे छे — ‘शुं समजीने?’ ‘स्नान करी लईश’ एम समजीने, आनो अर्थ
ए छे के — जेम कोई एक (मनुष्य), ‘स्नान करी लईश’ एम समजी पोताना निर्मळ
(स्वच्छ) अंगने (शरीरने) कादवथी खरडे छे, ते अविचारी (मूर्ख) छे, तेम पापथी