Moksha Marg Prakashak-Gujarati (Devanagari transliteration).

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शब्दपानुंशब्दपानुं
लौकांतिकदेव१७३
वक्तानुं स्वरूप१५, १७
वक्ता श्री सर्वज्ञ वीतराग२२१
वचनातीत३६१
वज्रकरणराजा२८०
वास्तविकसुख६०
विकल्प२१६
विकल्पनो अर्थ२१६
विनय मिथ्यात्व२७२
विपरीताभिनिवेश३३२, ३३४, ३३५
विभावभाव दूर करवानुं कारण२०२
विभावपर्याय२०१
विशुद्धता३६३, ३६४
विष्णुकुमार२७९
वीतरागता२५२
वीतरागता सहितभाव अने रागादिरूपभाव २१४
वीतरागता थई द्रष्टाज्ञातारूप प्रवर्ते
त्यां ज निर्बंधता२३१
वीतरागभाव२१७, २४६, २५०, २५७
वीतरागता ते निश्चयधर्म२३७
वीतरागभावरूप तप२३७
वीतरागभावरूप विशुद्धता२३७
वीतराग विज्ञान भाव
वीतराग विशेषज्ञान८, १०
वेदक सम्यक्त्व३३९
वेदनीय कर्म४४, ५९, ६०
वेदांत१२५, १३२
वेदांतिक मतोमां अन्यथा निरूपण१२४
वेदांती२१४
वैश्यादिक१२३
वेशेषिक१२७, १२९
वंदनयोग्य१८०, १८१
व्यवहार तथा निश्चय चारित्र२३४
व्यवहार तप२३६
व्यवहार धर्म२८९
व्यवहारनय२४७, २८१
व्यवहार पोषक उपदेश३०३
व्यवहार रत्नत्रय२६३
व्यवहारराशि३६४
व्यवहार श्रद्धान३०३
व्यवहार सम्यक्त्व३२९, ३३४, ३४६
व्यवहार सम्यग्दर्शन-ज्ञान-चारित्र२२५, ३३०
व्यवहाराभास२३९, २४७
व्यवहारावलंबी मिथ्याद्रष्टि जीवो२४८
व्यंतर१६९, १७०, १७१, १७२, २८२
व्यंतरोने अवधिज्ञान१७१
व्रत२९८
व्रत तपादि२४३
व्रतशील वगेरे२६०, २६२
वृषभावतार११३, १४३
शक्ति अपेक्षा१९८, २०३
शरीर आश्रित गुणो३३१
बीजा त्रीजा अने चोथा समयमां कर्मोदयना
निमित्तथी नवीन शरीरनुं धारवुं३५
शरीरमां परबुद्धि३३२
शास्त्रभक्ति२२७, २२८
शिवभूतिमुनि२२९
शिवमत१२७
शुक्लध्यान३५३
शुद्ध अने केवल शब्दनो अर्थ२०४
शुद्ध आत्मस्वरूप३०९
शुद्ध उपयोग२३५, २४१, २६२
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