Parmatma Prakash (Gujarati Hindi) (Bengali transliteration).

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Shri Digambar Jain Swadhyay Mandir Trust, Songadh - 364250
শ্রী দিগংবর জৈন স্বাধ্যাযমংদির ট্রস্ট, সোনগঢ - ৩৬৪২৫০
वन्दननिन्दनप्रतिक्रमणादिकं कुर्वाणस्यापि भावसंयमो नास्ति इत्यभिप्रायः ।।६६।। एवं मोक्षमोक्ष-
फ लमोक्षमार्गादिप्रतिपादकद्वितीयमहाधिकारमध्ये निश्चयनयेन पुण्यपापद्वयं समानमित्यादि-
व्याख्यानमुख्यत्वेन चतुर्दशसूत्रस्थलं समाप्तम्
अथानन्तरं शुद्धोपयोगादिप्रतिपादनमुख्यत्वेनैका-
धिकचत्वारिंशत्सूत्रपर्यन्तं व्याख्यानं करोति तत्रान्तरस्थलचतुष्टयं भवति तद्यथा प्रथमसूत्र-
पञ्चकेन शुद्धोपयोगव्याख्यानं करोति, तदनन्तरं पञ्चदशसूत्रपर्यन्तं वीतरागस्वसंवेदनज्ञान-
मुख्यत्वेन व्याख्यानम्, अत ऊर्ध्वं सूत्राष्टकपर्यन्तं परिग्रहत्यागमुख्यत्वेन व्याख्यानं, तदनन्तरं
त्रयोदशसूत्रपर्यन्तं केवलज्ञानादिगुणस्वरूपेण सर्वे जीवाः समाना इति मुख्यत्वेन व्याख्यानं
करोति
तद्यथा
रागादिविकल्पनिवृत्तिस्वरूपशुद्धोपयोगे संयमादयः सर्वे गुणास्तिष्ठन्तीति प्रति-
पादयति
অধিকার-২ : দোহা-৬৬ ]পরমাত্মপ্রকাশ: [ ৩২৯
क्या कर सकती है ? कुछ नहीं कर सकती ।।६६।।
इस तरह मोक्ष, मोक्षफ ल, मोक्षमार्गादिका कथन करनेवाले दूसरे महा अधिकारमें
निश्चयनयसे पुण्य, पाप दोनों समान हैं, इस व्याख्यानकी मुख्यतासे चौदह दोहे कहे आगे
शुद्धोपयोगके कथनकी मुख्यतासे इकतालीस दोहोंमें व्याख्यान करते हैं, और आठ दोहोंमें
परिग्रहत्यागके व्याख्यानकी मुख्यतासे कहते हैं, तथा तेरह दोहोंमें केवलज्ञानादि गुणस्वरूपकर
सब जीव समान हैं, ऐसा व्याख्यान है
अब प्रथम ही रागादि विकल्पकी निवृत्तिरूप शुद्धोपयोगमें संयमादि सब गुण रहते हैं,
ऐसा वर्णन करते हैं
তেনে দ্রব্যরূপ বংদনা, নিংদা অনে প্রতিক্রমণাদি করবা ছতাং পণ ভাবসংযম নথী. ৬৬.
এ প্রমাণে মোক্ষ, মোক্ষফল অনে মোক্ষমার্গাদিনা প্রতিপাদক বীজা মহাধিকারমাং নিশ্চযনযথী
পুণ্য, পাপ বন্নে সমান ছে ইত্যাদি ব্যাখ্যাননী মুখ্যতাথী চৌদ সূত্রোনুং স্থল সমাপ্ত থযুং.
ত্যার পছী শুদ্ধোপযোগাদিনা প্রতিপাদননী মুখ্যতাথী একতালীস সূত্রো সুধী ব্যাখ্যান করে
ছে. তেমাং চার অন্তরস্থল ছে তে আ প্রমাণে :(১) প্রথম পাংচ গাথাসূত্রথী শুদ্ধ-উপযোগনুং
ব্যাখ্যান করে ছে, (২) ত্যার পছী পংদর গাথাসূত্র সুধী বীতরাগ-স্বসংবেদনরূপ জ্ঞাননী মুখ্যতাথী
ব্যাখ্যান করে ছে, (৩) ত্যার পছী আঠ গাথাসূত্র সুধী পরিগ্রহত্যাগনী মুখ্যতাথী ব্যাখ্যান করে
ছে, (৪) ত্যার পছী তের গাথাসূত্র সুধী ‘কেবলজ্ঞানাদি গুণস্বরূপথী সর্ব জীবো সমান ছে’ এম
মুখ্যপণে ব্যাখ্যান করে ছে. তে আ প্রমাণে :
হবে, প্রথম জ রাগাদি বিকল্পোনী নিবৃত্তিরূপ শুদ্ধোপযোগমাং সংযমাদি সর্ব গুণো রহে ছে,
এম কহে ছে.