Parmatma Prakash (Gujarati Hindi) (English transliteration). Gatha: 16 (Adhikar 2).

< Previous Page   Next Page >


Page 229 of 565
PDF/HTML Page 243 of 579

 

background image
अथ यै षड्द्रव्यैः सम्यक्त्वविषयभूतैस्त्रिभुवनं भृतं तिष्ठति तानीदृक् जानीहीत्यभिप्रायं
मनसि संप्रधार्य सूत्रमिदं कथयति
१४२) दव्वइँ जाणहि ताइँ छह तिहुयणु भरियउ जेहिँ
आइ-विणास-विवज्जियहिँ णाणिहि पभणियएहिँ ।।१६।।
द्रव्याणि जानीहि तानि षट् त्रिभुवनं भृतं यैः
आदिविनाशविवर्जितैः ज्ञानिभिः प्रभणितैः ।।१६।।
दव्वइं इत्यादि दव्वइं द्रव्याणि जाणहि त्वं हे प्रभाकरभट्ट ताइं तानि
परमागमप्रसिद्धानि कतिसंख्योपेतानि छह षडेव यैः द्रव्यैः किं कृतम् तिहुयणु भरियउ
त्रिभुवनं भृतम् जेहिं यैः कर्तृभूतैः पुनरपि किंविशिष्टैः आइ-विणास-विवज्जयहिं
द्रव्यार्थिकनयेनादिविनाशविवर्जितैः पुनरपि कथंभूतैः णाणिहि पभणियएहिं ज्ञानिभिः प्रभणितैः
कथितैश्चेति अयमत्राभिप्रायः एतैः षड्भिर्द्रव्यैर्निष्पन्नोऽयं लोको न चान्यः कोऽपि लोकस्य
हर्ता कर्ता रक्षको वास्तीति किं च यद्यपि षड्द्रव्याणि व्यवहारसम्यक्त्वविषयभूतानि भवन्ति
आगे सम्यक्त्वके कारण जो छह द्रव्य हैं, उनसे यह तीनलोक भरा हुआ है, उनको
यथार्थ जानो, ऐसा अभिप्राय मनमें रखकर यह गाथासूत्र कहते हैं
गाथा१६
अन्वयार्थ :हे प्रभाकरभट्ट, तू [तानि षड्द्रव्याणि ] उन छहों द्रव्योंको [जानीहि ]
जान, [यैः ] जिन द्रव्योंसे [त्रिभुवनं भृतं ] यह तीन लोक भर रहा है, वे छह द्रव्य [ज्ञानिभिः ]
ज्ञानियोंने [आदिविनाशविवर्जितैः ] आदि अंतकर रहित द्रव्यार्थिकनयसे [प्रभणितैः ] कहे हैं
भावार्थ :वह लोक छह द्रव्योंसे भरा है, अनादिनिधन है, इस लोकका आदि अंत
नहीं है, तथा इसका कर्ता, हर्ता व रक्षक कोई नहीं है यद्यपि ये छह द्रव्य व्यवहारसम्यक्त्वके
have, samyaktvanA viShayabhUt je chha dravyo traN jagatamAn bharyAn paDyAn chhe temane evA
ja (evA ja svarUpe) jANo, evo abhiprAy manamAn rAkhIne A gAthA-sUtra kahe chhe
bhAvArthaA lok A chha dravyothI banelo chhe, paN bIjo koI lokano kartA, hartA
ke rakShak nathI.
vaLI, vyavahArasamyaktvanA viShayabhUt chha dravyo chhe topaN shuddhanishchayanayathI shuddhAtmAnI
anubhUtirUp vItarAg samyaktvano viShay to nityAnand jeno ek svabhAv chhe evo
adhikAr-2 dohA-16 ]paramAtmaprakAsha [ 229