Parmatma Prakash (Gujarati Hindi) (English transliteration). Gatha: 206 (Adhikar 2).

< Previous Page   Next Page >


Page 540 of 565
PDF/HTML Page 554 of 579

 

background image
540 ]
yogIndudevavirachita
[ adhikAr-2 dohA-206
अण्णु वि इत्यादि अण्णु वि अन्यदपि विशेषफलं कथ्यते भत्तिए जे मुणहिं भक्त्या
ये मन्यन्ते जानन्ति कम् इहु परमप्पपयासु इमं प्रत्यक्षीभूतं परमात्मप्रकाशग्रन्थमर्थतस्तु
परमात्मप्रकाशशब्दवाच्यं परमात्मतत्त्वं पावहिं प्राप्नुवन्ति ते वि तेऽपि कम् पयास
प्रकाशशब्दवाच्यं केवलज्ञानं तदाधारपरमात्मानं वा कथंभूतं परमात्मप्रकाशम् लोयालोय-
पयासयरु अनन्तगुणपर्यायसहितत्रिकालविषयलोकालोकप्रकाशकमिति तात्पर्यम् ।।२०५।।
अथ
३३७) जे परमप्पपयासयहं अणुदिणु णाउ लयंति
तुट्टइ मोहु तडत्ति तहँ तिहुयण-णाह हवंति ।।२०६।।
ये परमात्मप्रकाशस्य अनुदिनं नामं गृह्णन्ति
त्रुटयति मोहः झटिति तेषां त्रिभुवननाथा भवन्ति ।।२०६।।
भक्तिसे [इमं परमात्मप्रकाशम् ] इस परमात्मप्रकाश शास्त्रको [जानन्ति ] पढ़ें, सुनें, इसका
अर्थ जानें, [तेऽपि ] वे भी [लोकालोकप्रकाशकरं ] लोकालोकको प्रकाशनेवाले [प्रकाशम् ]
केवलज्ञान तथा उसके आधारभूत परमात्मतत्त्वको शीघ्र ही पा सकेंगे
अर्थात् परमात्मप्रकाश
नाम परमात्मतत्त्वका भी है, और इस ग्रंथका भी है, सो परमात्मप्रकाश ग्रंथके पढ़नेवाले दोनों
ही को पावेंगे
प्रकाश ऐसा केवलज्ञानका नाम है, उसका आधार जो शुद्ध परमात्मा अनंत
गुण पर्याय सहित तीनकालका जाननेवाला लोकालोकका प्रकाशक ऐसा आत्मद्रव्य उसे तुरंत
ही पावेंगे
।।२०५।।
आगे फि र भी परमात्मप्रकाशके पढ़नेका फल कहते हैं
गाथा२०६
अन्वयार्थ :[ये ] जो कोई भव्यजीव [परमात्मप्रकाशकस्य ] व्यवहारनयसे
परमात्माके प्रकाश करनेवाले इस ग्रंथका तथा निश्चयनयसे केवलज्ञानादि अनंतगुण सहित
bhAvArthavaLI bIjun visheSh phaL kahe chhe ke jeo A pratyakSha paramAtmaprakAsh granthane
arthathI paN paramAtmashabdathI vAchya evA paramAtmatattvane bhaktithI jANe chhe teo anant-
guNaparyAyasahit traNakALanA lokAlokanA prakAshak, prakAsh shabdathI vAchya evA kevaLagnAn tathA
temanA AdhArabhUt paramAtmaprakAshane
paramAtmatattvane pAme chhe, e tAtparya chhe. 205.
vaLI (have pharI paramAtmaprakAshanA abhyAsanun phaL kahe chhe)