Parmatma Prakash (Gujarati Hindi) (itrans transliteration).

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Shri Digambar Jain Swadhyay Mandir Trust, Songadh - 364250
shrI diga.nbar jain svAdhyAyama.ndir TrasTa, sonagaDh - 364250
adhikAr-1 : dohA-94 ]paramAtmaprakAsh: [ 155
अण्णु जि दंसणु अत्थि ण वि अण्णु जि अत्थि ण णाणु अण्णु जि चरणु ण अत्थि
जिय अन्यदेव दर्शनं नास्ति अन्यदेव ज्ञानं नास्ति अन्यदेव चरणं नास्ति हे जीव किं कृत्वा
मेल्लिवि अप्पा जाणु मुक्त्वा कम् आत्मानं जानीहीति तथाहि यद्यपि
षड्द्रव्यपञ्चास्तिकायसप्ततत्त्वनवपदार्थाः साध्यसाधकभावेन निश्चयसम्यक्त्वहेतुत्वाद्व्यवहारेण
सम्यक्त्वं भवति, तथापि निश्चयेन वीतरागपरमानन्दैकस्वभावः शुद्धात्मोपादेय इति
रुचिरूपपरिणामपरिणतशुद्धात्मैव निश्चयसम्यक्त्वं भवति
यद्यपि निश्चयस्वसंवेदनज्ञानसाधकत्वात्तु
व्यवहारेण शास्त्रज्ञानं भवति, तथापि निश्चयनयेन वीतरागस्वसंवेदनज्ञानपरिणतः शुद्धात्मैव
निश्चयज्ञानं भवति
यद्यपि निश्चयचारित्रसाधकत्वान्मूलोत्तरगुणा व्यवहारेण चारित्रं भवति,
तथापि शुद्धात्मानुभूतिरूपवीतरागचारित्रपरिणतः स्वशुद्धात्मैव निश्चयनयेन चारित्रं भवतीति
न अस्ति ] ज्ञान नहीं है, [अन्यद् एव चरणं नास्ति ] अन्य कोई चरित्र नहीं है, ऐसा
[जानीहि ] तू जान, अर्थात् आत्मा ही दर्शन ज्ञान चारित्र है, ऐसा संदेह रहित जानो
भावार्थ :यद्यपि छह द्रव्य, पाँच अस्तिकाय, सात तत्त्व, नौ पदार्थका श्रद्धान
कार्य-कारणभावसे निश्चयसम्यक्त्वका कारण होनेसे व्यवहारसम्यक्त्व कहा जाता है, अर्थात्
व्यवहार साधक है, निश्चय साध्य है, तो भी निश्चयनयकर एक वीतराग परमानंदस्वभाववाला
शुद्धात्मा ही उपादेय है, ऐसा रुचिरूप परिणामसे परिणत हुआ शुद्धात्मा ही निश्चयसम्यक्त्व है,
यद्यपि निश्चयस्वसंवेदनज्ञानका साधक होनेसे व्यवहारनयकर शास्त्रका ज्ञान भी ज्ञान है, तो भी
निश्चयनयकर वीतरागस्वसंवेदनज्ञानरूप परिणत हुआ शुद्धात्मा ही निश्चयज्ञान है
यद्यपि
निश्चयचारित्रके साधक होनेसे अट्ठाईस मूलगुण, चौरासी लाख उत्तरगुण, व्यवहारनयकर चारित्र
कहे जाते हैं, तो भी शुद्धात्मानुभूतिरूप वीतराग-चारित्रको परिणत हुआ निज शुद्धात्मा ही
bhAvArtha:jo ke Cha dravya, pA.nch astikAy, sAt tattva, ane nav padArtha
sAdhyasAdhakabhAv vaDe nishchayasamyaktvanA hetu hovAthI vyavahAranayathI samyaktva Che, topaN
nishchayanayathI vItarAg paramAna.nd jeno ek svabhAv Che evo shuddha AtmA upAdey Che , evI
ruchirUp pariNAme pariNamelo shuddha AtmA ja nishchayasamyaktva Che; jo ke shAstraj~nAn
nishchayasvasa.nvedanaj~nAnanu.n sAdhak hovAthI vyavahArathI j~nAn Che, topaN nishchayanayathI
vItarAgasvasa.nvedanaj~nAnarUpe pariNamelo shuddha AtmA ja nishchayaj~nAn Che; jo ke vyavahAranayathI mUL
-uttar guNo (aThThAvIs mUL guNo, chorAsIlAkh uttar guNo) nishchayachAritranA sAdhak hovAthI
chAritra Che topaN nishchayanayathI shuddhAtmAnubhUtirUp vItarAgachAritrarUpe pariNamelo svashuddhAtmA ja
chAritra Che.