Shri Digambar Jain Swadhyay Mandir Trust, Songadh - 364250
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जीवोऽपि पुद्गलः कालः जीव एतानि मुक्त्वा द्रव्याणि ।
इतराणि अखण्डानि विजानीहि त्वं आत्मप्रदेशैः सर्वाणि ।।२२।।
जीउ वि इत्यादि । जीउ वि जीवोऽपि पुग्गलु पुद्गलः कालु कालः जिय हे जीव ए
मेल्लेविणु एतानि मुक्त्वा दव्व द्रव्याणि इयर इतराणि धर्माधर्माकाशानि अखंड अखण्डद्रव्याणि
वियाणि विजानीहि तुहुं त्वं हे प्रभाकरभट्ट । कैः कृत्वाखण्डानि विजानीहि । अप्प-पएसहिं
आत्मप्रदेशैः । कतिसंख्योपेतानि सव्व सर्वाणि इति । तथाहि । जीवद्रव्याणि पृथक् पृथक्
जीवद्रव्यगणनेनानन्तसंख्यानि पुद्गलद्रव्याणि तेभ्योऽप्यनन्तगुणानि भवन्ति । धर्माधर्माकाशानि
पुनरेकद्रव्याण्येवेति । अत्र जीवद्रव्यमेवोपादेयं तत्रापि यद्यपि शुद्धनिश्चयेन शक्त्यपेक्षया सर्वे जीवा
उपादेयास्तथापि व्यक्त्यपेक्षया पञ्च परमेष्ठिन एव, तेष्वपि मध्ये विशेषेणार्हत्सिद्धा एव तयोरपि
गाथा – २२
अन्वयार्थ : — [जीव ] हे जीव, [त्वं ] तू [जीवः अपि ] जीव और [पुद्गलः ]
पुद्गल, [कालः ] काल [एतानि द्रव्याणि ] इन तीन द्रव्योंको [मुक्त्वा ] छोड़कर [इतराणि ]
दूसरे धर्म, अधर्म, आकाश [सर्वाणि ] ये सब तीन द्रव्य [आत्मप्रदेशैः ] अपने प्रदेशोंसे
[अखंडानि ] अखंडित हैं ।
भावार्थ : — जीवद्रव्य जुदा जुदा जीवोंकी गणनासे अनंत हैं, पुद्गलद्रव्य उससे भी
अनंतगुणे हैं, कालद्रव्याणु असंख्यात हैं, धर्मद्रव्य एक है, और वह लोकव्यापी है, अधर्मद्रव्य
भी एक है, और वह लोकव्यापी है, ये दोनों द्रव्य असंख्यात प्रदेशी हैं, और आकाशद्रव्य
अलोक अपेक्षा अनंतप्रदेशी है, तथा लोक अपेक्षा असंख्यातप्रदेशी हैं । ये सब द्रव्य अपने –
अपने प्रदेशोंकर सहित हैं, किसीके प्रदेश किसीसे नहीं मिलते । इन छहों द्रव्योंमें जीव ही
उपादेय है । यद्यपि शुद्ध निश्चयसे शक्तिकी अपेक्षा सभी जीव उपादेय हैं, तो भी व्यक्तिकी
अपेक्षा पंचपरमेष्ठी ही उपादेय हैं, उनमें भी अरहंत सिद्ध ही हैं, उन दोनोंमें भी सिद्ध ही हैं,
bhAvArtha: — jIvadravyo pR^ithak pR^ithak jIvadravyanI sa.nkhyAnI gaNatarIthI ana.nt Che,
pudgaladravyo tenAthI paN ana.ntaguNA Che, (kAlANu asa.nkhyAt Che) ane dharmadravya, adharmadravya ane
AkAshadravya ek ek Che.
ahI.n, ek jIvadravya ja upAdey Che. temA.n paN joke shuddhanishchayanayathI shakti-apekShAe
sarva jIvo upAdey Che topaN vyakti-apekShAe pA.nch parameShThI ja upAdey Che, temA.n paN visheSh
karIne arhanta ane siddha bhagava.nto ja upAdey Che ane te bannemA.n paN siddha bhagava.nto ja
upAdey Che, paramArthathI to mithyAtva, rAgAdi vibhAvapariNAmonI nivR^ittikALe svashuddhAtmA ja
adhikAr-2 : dohA-22 ]paramAtmaprakAsh: [ 241