Parmatma Prakash (Gujarati Hindi) (Oriya transliteration). Gatha-4 (Adhikar 2).

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Shri Digambar Jain Swadhyay Mandir Trust, Songadh - 364250
ଶ୍ରୀ ଦିଗଂବର ଜୈନ ସ୍ଵାଧ୍ଯାଯମଂଦିର ଟ୍ରସ୍ଟ, ସୋନଗଢ - ୩୬୪୨୫୦
१३०) जइ जिय उत्तमु होइ णवि एयहँ सयलहँ सोइ
तो किं तिण्णि वि परिहरवि जिण वच्चहिँ पर-लोइ ।।।।
यदि जीव उत्तमो भवति नैव एतेभ्यः सकलेभ्यः स एव
ततः किं त्रीण्यपि परिहृत्य जिनाः व्रजन्ति परलोके ।।।।
जइ इत्यादि जइ यदि चेत् जिय हे ज्ाीव उत्तमु होइ णवि उत्तमो भवति नैव केभ्यः
एयहं सयलहं एतेभ्यः पूर्वोक्ते भ्यो धर्मादिभ्यः कतिसंख्योपेतेभ्यः सकलेभ्यः सो वि स एव
पूर्वोक्त ो मोक्षः तो ततः कारणात् किं किमर्थं तिण्णि वि परिहरवि त्रीण्यपि परिहृत्य त्यक्त्वा जिण
जिनाः कर्तारः वच्चहिं व्रजन्ति गच्छन्ति
कुत्र गच्छन्ति पर-लोइ परलोकशब्दवाच्ये परमात्मध्याने
न तु कायमोक्षे चेति तथाहिपरलोकशब्दस्य व्युत्पत्त्यर्थः कथ्यते परः उत्कृष्टो
मिथ्यात्वरागादिरहितः केवलज्ञानाद्यनन्तगुणसहितः परमात्मा परशब्देनोच्यते तस्यैवंगुणविशिष्टस्य
गाथा
अन्वयार्थ :[जीव ] हे जीव, [यदि ] जो [एतेभ्यः सकलेभ्यः ] इन सबोंसे [सः ]
मोक्ष [उत्तमः ] उत्तम [एव ] ही [नैव ] नहीं [भवति ] होता [ततः ] तो [जिनाः ]
श्रीजिनवरदेव [त्रीण्यपि ] धर्म, अर्थ, काम इन तीनोंको [परिहृत्य ] छोड़कर [परलोके ]
मोक्षमें [किं ] क्यों [व्रजंति ] जाते ? इसलिये जाते हैं कि मोक्ष सबसे उत्कृष्ट है
।।
भावार्थ :पर अर्थात् उत्कृष्ट मिथ्यात्व रागादि रहित केवलज्ञानादि अनंत गुण सहित
परमात्मा वह पर है, उस परमात्माका लोक अर्थात् अवलोकन वीतराग परमानंद समरसीभावका
अनुभव वह परलोक कहा जाता है, अथवा परमात्माको परमशिव कहते हैं, उसका जो
अवलोकन वह शिवलोक है, अथवा परमात्माका ही नाम परमब्रह्म है, उसका लोक वह
ଭାଵାର୍ଥ:‘ପରଲୋକ’ ଶବ୍ଦନୋ ଵ୍ଯୁତ୍ପତ୍ତି ଅର୍ଥ କହେ ଛେ. ପର ଅର୍ଥାତ୍ ଉତ୍କୃଷ୍ଟ, ‘ପର’ ଶବ୍ଦଥୀ
ମିଥ୍ଯାତ୍ଵ ରାଗାଦି ରହିତ କେଵଳଜ୍ଞାନାଦି ଅନଂତ ଗୁଣ ସହିତ ପରମାତ୍ମା ସମଜଵୋ, ତେ ଗୁଣଵିଶିଷ୍ଟ
ପରମାତ୍ମାନୁଂ ଲୋକନ-ଅଵଲୋକନ-ଵୀତରାଗପରମାନଂଦରୂପ ସମରସୀଭାଵନୁଂ ଅନୁଭଵନ ତେ ଲୋକ ଛେ. ଏ
ପ୍ରମାଣେ ‘ପରଲୋକ’ ଶବ୍ଦନୋ ଅର୍ଥ ଛେ. ଅଥଵା ‘ପର’ ଶବ୍ଦଥୀ ପୂର୍ଵୋକ୍ତ ଲକ୍ଷଣଵାଳୋ ପରମାତ୍ମା ସମଜଵୋ.
ନିଶ୍ଚଯଥୀ ‘ପରମଶିଵ’ ଶବ୍ଦଥୀ ଵାଚ୍ଯ ଏଵୋ ମୁକ୍ତାତ୍ମା ‘ଶିଵ’ ସମଜଵୋ, ତେନୋ ଲୋକ ତେ
ଶିଵଲୋକ ଛେ. ଅଥଵା ‘ପରମବ୍ରହ୍ମ’ ଶବ୍ଦଥୀ ଵାଚ୍ଯ ଏଵୋ ମୁକ୍ତାତ୍ମା ପରମବ୍ରହ୍ମ ସମଜଵୋ, ତେନୋ ଲୋକ
ତେ ବ୍ରହ୍ମଲୋକ ଛେ. ଅଥଵା ‘ପରମଵିଷ୍ଣୁ’ ଶବ୍ଦଥୀ ଵାଚ୍ଯ ଏଵୋ ମୁକ୍ତାତ୍ମା ଵିଷ୍ଣୁ ସମଜଵୋ, ତେନୋ ଲୋକ
ତେ ଵିଷ୍ଣୁଲୋକ ଛେ. ଏ ପ୍ରମାଣେ ‘ପରଲୋକ’ ଶବ୍ଦଥୀ ମୋକ୍ଷ କହ୍ଯୋ ଛେ.
ଅଧିକାର-୨ : ଦୋହା-୪ ]ପରମାତ୍ମପ୍ରକାଶ: [ ୨୦୫