Samaysar-Gujarati (Devanagari transliteration). Kalash: 204 Gatha: 332.

< Previous Page   Next Page >


Page 479 of 642
PDF/HTML Page 510 of 673

 

कहानजैनशास्त्रमाळा ]

सर्वविशुद्धज्ञान अधिकार
४७९
(शार्दूलविक्रीडित)
कर्मैव प्रवितर्क्य ट्रकर्तृ हतकैः क्षिप्त्वात्मनः कर्तृतां
कर्तात्मैष कथञ्चिदित्यचलिता कैश्चिच्छ्रुतिः कोपिता
तेषामुद्धतमोहमुद्रितधियां बोधस्य संशुद्धये
स्याद्वादप्रतिबन्धलब्धविजया वस्तुस्थितिः स्तूयते
।।२०४।।
कम्मेहि दु अण्णाणी किज्जदि णाणी तहेव कम्मेहिं
कम्मेहि सुवाविज्जदि जग्गाविज्जदि तहेव कम्मेहिं ।।३३२।।

श्लोकार्थः[कैश्चित् हतकैः] कोई आत्माना घातक (सर्वथा एकांतवादीओ) [कर्म एव कर्तृ प्रवितर्क्य] कर्मने ज कर्ता विचारीने [आत्मनः कर्तृतां क्षिप्त्वा] आत्माना कर्तापणाने उडाडीने, ‘[एषः आत्मा कथञ्चित् क र्ता] आ आत्मा कथंचित् कर्ता छे’ [इति अचलिता श्रुतिः कोपिता] एम कहेनारी अचलित श्रुतिने कोपित करे छे (निर्बाध जिनवाणीनी विराधना करे छे); [उद्धत-मोह-मुद्रित-धियां तेषाम् बोधस्य संशुद्धये] तीव्र मोहथी जेमनी बुद्धि बिडाई गई छे एवा ते आत्मघातकोना ज्ञाननी संशुद्धि अर्थे [वस्तुस्थितिः स्तूयते] (नीचेनी गाथाओमां) वस्तुस्थिति कहेवामां आवे छे[स्याद्वाद-प्रतिबन्ध-लब्ध-विजया] के जे वस्तुस्थितिए स्याद्वादना प्रतिबंध वडे विजय मेळव्यो छे (अर्थात् जे वस्तुस्थिति स्याद्वादरूप नियमथी निर्बाधपणे सिद्ध थाय छे).

भावार्थःकोई एकांतवादीओ सर्वथा एकांतथी कर्मनो कर्ता कर्मने ज कहे छे अने आत्माने अकर्ता ज कहे छे; तेओ आत्माना घातक छे. तेमना पर जिनवाणीनो कोप छे, कारण के स्याद्वादथी वस्तुस्थितिने निर्बाध रीते सिद्ध करनारी जिनवाणी तो आत्माने कथंचित् कर्ता कहे छे. आत्माने अकर्ता ज कहेनारा एकान्तवादीओनी बुद्धि उत्कट मिथ्यात्वथी बिडाई गयेली छे; तेमना मिथ्यात्वने दूर करवाने आचार्यभगवान स्याद्वाद अनुसार जेवी वस्तुस्थिति छे तेवी, नीचेनी गाथाओमां कहे छे. २०४.

‘आत्मा सर्वथा अकर्ता नथी, कथंचित् कर्ता पण छे’ एवा अर्थनी गाथाओ हवे कहे छेः

‘‘कर्मो करे अज्ञानी तेम ज ज्ञानी पण कर्मो करे,
कर्मो सुवाडे तेम वळी कर्मो जगाडे जीवने; ३३२.