Samaysar-Gujarati (Devanagari transliteration).

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कहानजैनशास्त्रमाळा ]

सर्वविशुद्धज्ञान अधिकार
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यथा सेटिका तु न परस्य सेटिका सेटिका च सा भवति
तथा दर्शनं तु न परस्य दर्शनं दर्शनं तत्तु ।।३५९।।
एवं तु निश्चयनयस्य भाषितं ज्ञानदर्शनचरित्रे
शृणु व्यवहारनयस्य च वक्तव्यं तस्य समासेन ।।३६०।।
यथा परद्रव्यं सेटयति सेटिकात्मनः स्वभावेन
तथा परद्रव्यं जानाति ज्ञातापि स्वकेन भावेन ।।३६१।।
यथा परद्रव्यं सेटयति सेटिकात्मनः स्वभावेन
तथा परद्रव्यं पश्यति जीवोऽपि स्वकेन भावेन ।।३६२।।
यथा परद्रव्यं सेटयति सेटिकात्मनः स्वभावेन
तथा परद्रव्यं विजहाति ज्ञातापि स्वकेन भावेन ।।३६३।।
यथा परद्रव्यं सेटयति सेटिकात्मनः स्वभावेन
तथा परद्रव्यं श्रद्धत्ते सम्यग्द्रष्टिः स्वभावेन ।।३६४।।

ते तो दर्शक ज छे. [यथा] जेम [सेटिका तु] खडी [परस्य न] परनी (भींत आदिनी) नथी, [सेटिका] खडी [सा च सेटिका भवति] ते तो खडी ज छे, [तथा] तेम [संयतः तु] संयत (त्याग करनारो, आत्मा) [परस्य न] परनो (परद्रव्यनो) नथी, [संयतः] संयत [सः तु संयतः] ते तो संयत ज छे. [यथा] जेम [सेटिका तु] खडी [परस्य न] परनी नथी, [सेटिका] खडी [सा च सेटिका भवति] ते तो खडी ज छे, [तथा] तेम [दर्शनं तु] दर्शन अर्थात् श्रद्धान [परस्य न] परनुं नथी, [दर्शनं तत् तु दर्शनम्] दर्शन ते तो दर्शन ज छे अर्थात् श्रद्धान ते तो श्रद्धान ज छे.

[एवं तु] ए प्रमाणे [ज्ञानदर्शनचरित्रे] ज्ञान-दर्शन-चारित्र विषे [निश्चयनयस्य भाषितम्] निश्चयनयनुं कथन छे. [तस्य च] वळी ते विषे [समासेन] संक्षेपथी [व्यवहारनयस्य वक्तव्यं] व्यवहारनयनुं कथन [शृणु] सांभळ.

[यथा] जेम [सेटिका] खडी [आत्मनः स्वभावेन] पोताना स्वभावथी [परद्रव्यं] (भींत आदि) परद्रव्यने [सेटियति] सफेद करे छे, [तथा] तेम [ज्ञाता अपि] ज्ञाता पण [स्वकेन भावेन] पोताना स्वभावथी [परद्रव्यं] परद्रव्यने [जानाति] जाणे छे. [यथा] जेम [सेटिका] खडी [आत्मनः स्वभावेन] पोताना स्वभावथी [परद्रव्यं] परद्रव्यने [सेटयति] सफेद करे छे, [तथा] तेम [जीवः अपि] जीव पण [स्वकेन भावेन] पोताना स्वभावथी [परद्रव्यं] परद्रव्यने [पश्यति] देखे छे. [यथा] जेम [सेटिका] खडी [आत्मनः स्वभावेन] पोताना स्वभावथी [परद्रव्यं] परद्रव्यने [सेटयति]

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