कहानजैनशास्त्रमाळा ]
ते तो दर्शक ज छे. [यथा] जेम [सेटिका तु] खडी [परस्य न] परनी ( – भींत आदिनी) नथी, [सेटिका] खडी [सा च सेटिका भवति] ते तो खडी ज छे, [तथा] तेम [संयतः तु] संयत (त्याग करनारो, आत्मा) [परस्य न] परनो ( – परद्रव्यनो) नथी, [संयतः] संयत [सः तु संयतः] ते तो संयत ज छे. [यथा] जेम [सेटिका तु] खडी [परस्य न] परनी नथी, [सेटिका] खडी [सा च सेटिका भवति] ते तो खडी ज छे, [तथा] तेम [दर्शनं तु] दर्शन अर्थात् श्रद्धान [परस्य न] परनुं नथी, [दर्शनं तत् तु दर्शनम्] दर्शन ते तो दर्शन ज छे अर्थात् श्रद्धान ते तो श्रद्धान ज छे.
[एवं तु] ए प्रमाणे [ज्ञानदर्शनचरित्रे] ज्ञान-दर्शन-चारित्र विषे [निश्चयनयस्य भाषितम्] निश्चयनयनुं कथन छे. [तस्य च] वळी ते विषे [समासेन] संक्षेपथी [व्यवहारनयस्य वक्तव्यं] व्यवहारनयनुं कथन [शृणु] सांभळ.
[यथा] जेम [सेटिका] खडी [आत्मनः स्वभावेन] पोताना स्वभावथी [परद्रव्यं] (भींत आदि) परद्रव्यने [सेटियति] सफेद करे छे, [तथा] तेम [ज्ञाता अपि] ज्ञाता पण [स्वकेन भावेन] पोताना स्वभावथी [परद्रव्यं] परद्रव्यने [जानाति] जाणे छे. [यथा] जेम [सेटिका] खडी [आत्मनः स्वभावेन] पोताना स्वभावथी [परद्रव्यं] परद्रव्यने [सेटयति] सफेद करे छे, [तथा] तेम [जीवः अपि] जीव पण [स्वकेन भावेन] पोताना स्वभावथी [परद्रव्यं] परद्रव्यने [पश्यति] देखे छे. [यथा] जेम [सेटिका] खडी [आत्मनः स्वभावेन] पोताना स्वभावथी [परद्रव्यं] परद्रव्यने [सेटयति]