Samaysar-Gujarati (Devanagari transliteration). Kalash: 226.

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कहानजैनशास्त्रमाळा ]

सर्वविशुद्धज्ञान अधिकार
५४३
(आर्या)
मोहाद्यदहमकार्षं समस्तमपि कर्म तत्प्रतिक्रम्य
आत्मनि चैतन्यात्मनि निष्कर्मणि नित्यमात्मना वर्ते ।।२२६।।

अनुमोदना त्रणे लईने तेना पर मन, वचन, कायामांथी बब्बे लगाव्यां. ए रीते बनेला आ त्रण भंगोने +‘३२’नी संज्ञाथी ओळखी शकाय. ५ थी ७ सुधीना भंगोमां कृत, कारित, अनुमोदना त्रणे लईने तेना पर मन, वचन, कायामांथी एकेक लगाव्युं. आ त्रण भंगोने ‘३१’नी संज्ञाथी ओळखी शकाय. ८ थी १० सुधीना भंगोमां कृत, कारित, अनुमोदनामांथी बब्बे लईने तेमना पर मन, वचन, काया त्रणे लगाव्यां. आ त्रण भंगोने ‘२३’नी संज्ञावाळा भंगो तरीके ओळखी शकाय. ११थी १९ सुधीना भंगोमां कृत, कारित, अनुमोदनामांथी बब्बे लईने तेमना पर मन, वचन, कायामांथी बब्बे लगाव्यां. आ नव भंगोने ‘२२’नी संज्ञाथी ओळखी शकाय. २० थी २८ सुधीना भंगोमां कृत, कारित, अनुमोदनामांथी बब्बे लईने तेमना पर मन, वचन, कायामांथी एकेक लगाव्यां. आ नव भंगोने ‘२१’नी संज्ञावाळा भंगो तरीके ओळखी शकाय. २९ थी ३१ सुधीना भंगोमां कृत, कारित, अनुमोदनामांथी एकेक लईने तेमना पर मन, वचन, काया त्रणे लगाव्यां. आ त्रण भंगोने ‘१३’नी संज्ञाथी ओळखी शकाय. ३२ थी ४० सुधीना भंगोमां कृत, कारित, अनुमोदनामांथी एकेक लईने तेमना पर मन, वचन, कायामांथी बब्बे लगाव्यां. आ नव भंगोने ‘१२’नी संज्ञाथी ओळखी शकाय. ४१ थी ४९ सुधीना भंगोमां कृत, कारित, अनुमोदनामांथी एकेक लईने तेमना पर मन, वचन, कायामांथी एकेक लगाव्युं. आ नव भंगोने ‘११’नी संज्ञाथी ओळखी शकाय. बधा मळीने ४९ भंग थया.)

हवे आ कथनना कळशरूपे काव्य कहे छेः

श्लोकार्थः[यद् अहम् मोहात् अकार्षम्] जे में मोहथी अर्थात् अज्ञानथी (भूत काळमां) कर्म कर्यां, [तत् समस्तम् अपि कर्म प्रतिक्रम्य] ते समस्त कर्मने प्रतिक्रमीने [निष्कर्मणि

*‘३३’नी समस्याथीसंज्ञाथीओळखी शकाय. २ थी ४ सुधीना भंगोमां कृत, कारित,

* कृत, कारित, अनुमोदनाए त्रणे लीधां ते बताववा प्रथम ‘३’नो आंकडो मूकवो, अने पछी मन, वचन, कायाए त्रणे लीधां ते बताववा तेनी पासे बीजो ‘३’नो आंकडो मूकवो. आ रीते ‘३३’नी समस्या थई.

+कृत, कारित, अनुमोदना त्रणे लीधां ते बताववा प्रथम ‘३’नो आंकडो मूकवो; अने पछी मन,
वचन, कायामांथी बे लीधां ते बताववा ‘३’नी पासे ‘२’नो आंकडो मूकवो. ए रीते ‘३२’नी
संज्ञा थई.