Atmadharma magazine - Ank 303
(Year 26 - Vir Nirvana Samvat 2495, A.D. 1969)
(Devanagari transliteration).

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: पोष : २४९प आत्मधर्म : २९ :
अमे जिनवरनां सन्तान (नवा सभ्योनां नाम)
२१६४ प्रज्ञाबेन रजनीकांत जैन मुंबई–८० २१७९ भरत एम. जैन रखियाल
२१६प रत्नाबेन वसंतलाल जैन मुंबई–प६ २१८० मनुभाई ताराचंद जैन रखियाल
२१६६ आशाबेन जादवजी जैन सोनगढ २१८१ हसमुख केशवलाल जैन रखियाल
२१६७ दिलीप जयंतिलाल जैन कलकता २१८२ रतिलाल न्यालचंद जैन रखियाल
२१६८ नीलाबेन कांतिलाल जैन अमदावाद २१८३ वसंत मीठालाल जैन रखियाल
२१६९ सनत तुलसीदास जैन मुंबई–१९ २१८४ भरत विजयकांत जैन लाठी
२१७० राजेशकुमार हसमुखलाल जैन मुंबई–९२ २१८प किर्तीकुमार तलकचंद जैन प्रतापरा
२१७१ ए ईलाकुमारी रमणिकलाल जैन मुंबई–९२ २१८६ विजय धीरजलाल जैन प्रतापरा
२१७१ बी हरेनकुमार रमणिकलाल जैन मुंबई–९२
२१८७ ए नेमिश शांतिलाल जैन मुंबई–२२
२१७२ निखिल छगनलाल जैन मुंबई–७७ २१८७ बी केतन शांतिलाल जैन मुंबई–२२
२१७३ अरूणाबेन मनसुखलाल जैन सोनगढ २१८८ संजय प्रफुलचंद्र जैन मुंबई–२६
२१७४ ए जिनमतिबेन छोटालाल जैन सोनगढ २१८९ ए भरत रतीलाल जैन धनसुरा
२१७४ बी मनहरलाल छोटालाल जैन सोनगढ २१८९ बी मुकेश रतीलाल जैन धनसुरा
२१७प ज्योतिबेन मगनलाल जैन अमदावाद २१८९ सी नीपूणाबेन रतीलाल जैन धनसुरा
२१७६ ए विजयकुमार रमणीकलाल जैन वांकानेर २१९० सुनील एस. जैन मुंबई–४
२१७६ बी कमलाबेन रमणीकलाल जैन वांकानेर २१९१ दिनकरराय छगनलाल जैन मुंबई–६४
२१७७ ए प्रविणचंद्र नेमचंद जैन हिंमतनगर २१९२ ए प्रेमीलाबेन एम. जैन अमदावाद
२१७७ बी बीपीनचंद्र नेमचंद जैन हिंमतनगर २१९२ बी अंजनाबेन एम. जैन अमदावाद
२१७७ सी राजेन्द्र नेमचंद जैन हिंमतनगर २१९२ सी नयनाबेन एम जैन अमदावाद
२१७७ डी ईन्दीराबेन नेमचंद जैन हिंमतनगर २१९३ ए रजनीकांत मनसुखलाल जैन विंछीया
२१७७ ई कोकिलाबेन नेमचंद जैन हिंमतनगर २१९३ बी अरूण मनसुखलाल जैन विंछीया
२१७८ ए चेतनकुमार सुमनराय जैन मुंबई–७४ २१९४ हसमुख मणीलाल जैन मुंबई–४
२१७८ बी सोनलबेन सुमनराय जैन मुंबई–७४ २१९प कैलाशबेन जैन रखियाल
२१९प पछी ४० नाम रखियालना सभ्योनां छे, ते दरेकना पूरा नाम–सरनामा–
उंमर–अभ्यास ने जन्मदिवस आव्या पछी तेमनां नामो छापीशुं. तथा बीजा सभ्योनां नाम
पण हवे पछी आपीशुं. बंधुओ, तमारा पत्रनो जवाब आवतां वार लागे के सभ्यनंबर
मळतां वार लागे तो जरा धीरज राखवा विनंति छे, केमके वर्ष दरमियान आत्मधर्मने
लगता चार हजार उपरांत पत्रो आवता होय छे, ने लेखन–संपादन उपरांत ते बधा विविध
प्रकारना पत्रो वांचीने तेनी व्यवस्था एकला हाथे करवानी होय छे.
(सं.)