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(साखी)
समवसरण-जिनवर तणो, दीधो द्रष्ट चितार;
उरमां अमृत सींचीने, कर्यो परम उपकार.
सीमंधर-कुंदनी रे के वात मीठी लागे साहेलडी,
अंतरना भावमां रे के उज्ज्वळता जागे साहेलडी;
खम्मा मुज मातने रे के अंतर उजाळ्यां साहेलडी,
भव्योनां दिलमां रे के दीवडा जगाव्या साहेलडी....जन्म०
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