ऐसा कुछ भी नहीं है। अन्दरमें कुछ है, अबुद्धिपूर्वकका कुछ है। मन्दपने.. उसका नाम भी कुछ नहीं सकते, ऐसा कोई लोभ है। इतना लोभ नुकसान करता है, तो इतने बडे लोभकी तो क्या बात करनी? वह लोभ तो बैलगाडी जितना हुआ।
प्रशममूर्ति भगवती मातनो जय हो! माताजीनी अमृत वाणीनो जय हो!