Chha Dhala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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१३० ][ छ ढाळा
कषायोना अभावपूर्वक) उत्पन्न आत्मानी शुद्धि
विशेषने देशचारित्र कहे छे. आ श्रावक दशामां पांच
पापोनो स्थूळरूप एकदेश त्याग होय छे तेने अणुव्रत
कहेवामां आवे छे.
अतिचारःव्रतनी अपेक्षा राखवा छतां तेनो एकदेश भंग
थवो ते अतिचार कहेवाय छे.
अनध्यवसायः(मोह)‘कांईक छे’ पण शुं छे तेना
निश्चयरहित ज्ञानने अनध्यवसाय कहे छे.
अनर्थदंडःप्रयोजन वगरनी मन, वचन, काया तरफनी
अशुभ प्रवृत्ति.
अनर्थदंडव्रतःप्रयोजन वगरनी मन, वचन, काया तरफनी
अशुभ प्रवृत्तिनो त्याग.
अवधिज्ञानःद्रव्य-क्षेत्र-काळ-भावनी मर्यादापूर्वक रूपी
पदार्थोने स्पष्ट जाणनारुं ज्ञान.
उपभोगःवारंवार भोगवी शकाय तेवी वस्तु.
गुणःद्रव्यना आश्रये, द्रव्यना बधा भागमां अने तेनी बधी
हालतमां जे हमेशां रहे ते.
गुणव्रतःअणुव्रतो अने मूळगुणोने पुष्ट करनारुं व्रत.
परःआत्माथी (जीवथी) जुदी वस्तुओने पर कहेवाय छे.