चोथी ढाळ ][ १२९
गुणस्थानना निर्विकल्प आनंदमां लीन थाय छे.
ज्यारे छठ्ठा गुणस्थानमां आवे छे त्यारे तेने २८
मूळगुणोने अखंडितपणे पाळवाना शुभविकल्प आवे
छे. तेने त्रण कषायना अभावरूप निश्चयसम्यक्चारित्र
होय तथा त्रणे काळ भावलिंगी मुनिने नग्न-
दिगम्बर दशा होय छे तेमां कदी अपवाद होतो नथी,
माटे वस्त्रादि सहित मुनि होय नहि.
विकथाः — स्त्री, भोजन, देश अने राज्य ए चारनी अशुभ-
भावरूप कथा ते विकथा छे.
श्रावकव्रतः — ५ अणुव्रत, ३ गुणव्रत अने ४ शिक्षाव्रत ए बार
व्रत छे.
रोगत्रयः — त्रण रोग — जन्म, जरा अने मरण.
हिंसाः — १. खरेखर रागादि भावोनुं प्रगट न थवुं ते अहिंसा
छे, अने ते रागादि भावोनी उत्पत्ति थवी ते हिंसा
छे. एवुं जैनशास्त्रनुं टूंकु रहस्य छे.
२. संकल्पी, आरंभी, उद्योगिनी अने विरोधिनी ए चार
अथवा द्रव्यहिंसा अने भावहिंसा ए बे.
चोथी ढाळनो लक्षण-संग्रह
अणुव्रतः — १-निश्चयसम्यग्दर्शन सहित चारित्रगुणनी आंशिक
शुद्धि थवाथी (अनंतानुबंधी तथा अप्रत्याख्यानी