Chha Dhala-Gujarati (Devanagari transliteration). Chothi Dhalano Bhed-sangrah.

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१२८ ][ छ ढाळा
चोथी ढाळनो भेद-संग्रह
काळःनिश्चयकाळ अने व्यवहारकाळ; अथवा भूत, भविष्य
अने वर्तमान.
चारित्रःमोह-क्षोभ रहित आत्माना शुद्ध परिणाम,
भावलिंगी श्रावकपद अने भावलिंगी मुनिपद.
ज्ञानना दोषःसंशय, विपर्यय अने अनध्यवसाय
(अचोक्कसता).
दिशाःपूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, इशान, वायव्य, नैॠत्य,
अग्निकोण, ऊर्ध्व अने अधोए दश छे.
पर्व चतुष्टयःदरेक मासनी बे आठम तथा बे चौदश.
मुनिःसमस्त व्यापारथी विरक्त, चार प्रकारनी आराधनामां
तल्लीन, निर्ग्रंथ अने निर्मोह एवा सर्व साधु होय
छे. (नियमसार-गा. ७५) ‘ते निश्चयसम्यग्दर्शन
सहित, विरागी थईने, समस्त परिग्रहनो त्याग
करीने, शुद्धोपयोगरूप मुनिधर्म अंगीकार करीने,
अंतरंगमां शुद्धोपयोगरूप द्वारा पोताना आत्मानो
अनुभव करे छे. परद्रव्यमां अहंबुद्धि करता नथी,
ज्ञानादि स्वभावने ज पोताना माने छे, परभावोमां
ममत्व करता नथी, कोईने इष्ट-अनिष्ट मानी तेमां
राग-द्वेष करता नथी. हिंसादि अशुभ उपयोगनुं तो
तेने अस्तित्व ज मटी गयुं होय छे. अनेकवार सातमा