ब्रह्मचर्याणुव्रतीनो विचार, भेदविज्ञाननी जरूर, मनुष्य-
पर्यायनी दुर्लभता तथा तेनी सफळतानो उपाय, मरण
वखतनुं कर्तव्य, वैद्य-डॉक्टर वगेरे द्वारा मरण थाय छतां
अहिंसा, शत्रुनो सामनो करवो-न करवो, सम्यग्ज्ञान,
सम्यग्ज्ञान थवानो वखत अने तेनो महिमा, संल्लेखनानो
विधि अने कर्तव्य, ज्ञान वगर मुक्तिनो तथा सुखनो
अभाव, ज्ञाननुं फळ तथा ज्ञानी-अज्ञानीना कर्मनाश अने
विषयनी इच्छाने शांत करवानो उपाय
शके एवुं क्षेत्र, व्रतधारीने मळनारी गति, प्रयोजनभूत
वात, बधुं जाणनार ज्ञान अने सर्वोत्तम सुख आपनार
वस्तुनुं फक्त नाम बतावो.