वैराग्य उपावन माई, चिंतै अनुप्रेक्षा भाई. १.
महान पुरुषार्थी छे, कारण के तेओ (भव-भोगनतैं) संसार
अने भोगोथी (वैरागी) विरक्त होय छे अने (वैराग्य)
वीतरागताने (उपावन) उत्पन्न करवा माटे (माई) माता
समान (अनुप्रेक्षा) बार भावनाओनुं (चिन्तै) चिंतवन करे छे.
Chha Dhala-Gujarati (Devanagari transliteration). Panchmi Dhal Gatha: 1 (Dhal 5).
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