Chha Dhala-Gujarati (Devanagari transliteration). Panchmi Dhal Gatha: 1 (Dhal 5).

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पांचमी ढाल
बार भावना चिंतववानुं कारण, तेना अधिाकारी
अने तेनुं फळ
(चाल छंद)
मुनि सकलव्रती बडभागी, भव-भोगनतैं वैरागी;
वैराग्य उपावन माई, चिंतै अनुप्रेक्षा भाई. १.
अन्वयार्थ(भाई) हे भव्य जीव! (सकलव्रती)
महाव्रतना धारक (मुनि) भावलिंगी मुनिराज (बडभागी)
महान पुरुषार्थी छे, कारण के तेओ (भव-भोगनतैं) संसार
अने भोगोथी (वैरागी) विरक्त होय छे अने (वैराग्य)
वीतरागताने (उपावन) उत्पन्न करवा माटे (माई) माता
समान (अनुप्रेक्षा) बार भावनाओनुं (चिन्तै) चिंतवन करे छे.
भावार्थपांच महाव्रतोने धारण करनार भावलिंगी
मुनिराज महापुरुषार्थवान छे, केमके तेओ संसार, शरीर अने