Chha Dhala-Gujarati (Devanagari transliteration). Gatha: 2 (Dhal 5).

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१३८ ][ छ ढाळा
भोगोथी अत्यंत विरक्त होय छे; अने जेवी रीते कोई माता
पुत्रने जन्म आपे छे तेवी रीते आ बार भावनाओ
वैराग्यने पेदा करे छे तेथी मुनिराज आ बार भावनाओनुं
चिंतवन करे छे.
भावनाओनुं फळ अने मोक्षसुखप्राप्तिनो समय
इन चिन्तत समसुख जागै, जिमि ज्वलन पवनके लागै;
जबही जिय आतम जानै, तबही जिय शिवसुख ठानै. २.
अन्वयार्थ(जिमि) जेवी रीते (पवनके) पवनना (लागै)
लागवाथी (ज्वलन) अग्नि (जागै) भभूकी ऊठे छे. [तेवी रीते
आ बार भावनाओनुं
] (चिन्तत) चिंतवन करवाथी (समसुख)
समतारूपी सुख (जागै) प्रगट थाय छे. (जबही) ज्यारे (जिय)
जीव (आतम) आत्मस्वरूपने (जानै) जाणे छे (तबही) त्यारे ज
(जिय) जीव (शिवसुख) मोक्षसुखने (ठानै) प्राप्त करे छे.
भावार्थजेवी रीते पवन लागवाथी अग्नि एकदम
भभूकी ऊठे छे तेवी रीते आ बार भावनाओनुं वारंवार