Chha Dhala-Gujarati (Devanagari transliteration). Gatha: 3 (Dhal 5).

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पांचमी ढाळ ][ १३९
चिंतवन करवाथी समता (शांति)रूपी सुख प्रगट थई जाय छे
वधी जाय छे. ज्यारे आ जीव आत्मस्वरूपने जाणे छे त्यारे
पर पदार्थोथी संबंध छोडीने परमानंदमय स्व-स्वरूपमां लीन
थईने समतारसनुं पान करे छे अने छेवटे मोक्षसुखने प्राप्त करे
छे. २.
[ते बार भावनाओनुं स्वरूप कहेवाय छे]
अनित्य भावना
जोबन गृह गो धन नारी, हय गय जन आज्ञाकारी;
इन्द्रिय-भोग छिन थाई, सुरधनु चपला चपलाई. ३.
अन्वयार्थ(जोबन) युवानी, (गृह) घर, (गो) गाय,
(धन) लक्ष्मी, (नारी) स्त्री, (हय) घोडा, (गय) हाथी, (जन)
कुटुंबी, (आज्ञाकारी) आज्ञा उठावनार नोकर-चाकर अने
(इन्द्रिय-भोग) पांच इन्द्रियोना भोग ए बधा (सुरधन)
इन्द्रधनुष्य तथा (चपला) वीजळीनी (चपलाई) चंचळता-
क्षणिकतानी माफक (छिन थाई) क्षणमात्र रहेनारां छे.