Chha Dhala-Gujarati (Devanagari transliteration). Gatha: 4 (Dhal 5).

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१४० ][ छ ढाळा
भावार्थयुवानी, मकान, गाय, भेंस, धन, झवेरात,
स्त्री, घोडा, हाथी, कुटुंबी, नोकर अने पांच इन्द्रियोना विषय ए
बधी चीजो क्षणिक छे-अनित्य छे-नाशवंत छे. जेम इन्द्रधनुष्य
अने वीजळी वगेरे जोतजोतामां विलय थई जाय छे तेम आ
जुवानी वगेरे पण थोडा वखतमां नाश पामे छे. ते कोई पदार्थ
नित्य अने स्थायी नथी पण निजशुद्धात्मा ज नित्य अने स्थायी
छे-एम स्वसन्मुखतापूर्वक चिंतवन करी, सम्यग्द्रष्टि जीव
वीतरागतानी वृद्धि करे छे ते अनित्य भावना छे. मिथ्याद्रष्टि
जीवने अनित्यादि एक पण साची भावना होती नथी. ३.
२-अशरण भावना
सुर असुर खगाधिप जेते, मृग ज्यों हरि, काल दले ते;
मणि मंत्र तंत्र बहु होई, मरते न बचावै कोई. ४.