Chha Dhala-Gujarati (Devanagari transliteration). Gatha: 5 (Dhal 5).

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पांचमी ढाळ ][ १४१
अन्वयार्थ(सुर असुर खगाधिप) देवना इन्द्र,
असुरना इन्द्र अने खगेन्द्र [गरुड, हंस] (जेते) जे जे छे (ते)
ते बधानो (मृग हरि ज्यों
) जेम हरणने सिंह मारी नाखे
छे तेम (काल) मरण (दले) नाश करे छे. (मणि) चिंतामणि
वगेरे मणि-रत्नो (मंत्र) मोटा मोटा रक्षामंत्र (तंत्र) तंत्र (बहु
होई) घणां होवा छतां (मरते) मरण पामनारने (कोई) ते
कोई (न बचावै) बचावी शकतुं नथी.
भावार्थसंसारमां जे जे देवेन्द्र, असुरेन्द्र, खगेन्द्र,
(पक्षीओना राजा) वगेरे छे ते सर्वनोजेम हरणने सिंह
मारी नांखे छे तेममृत्यु नाश करे छे. चिंतामणि वगेरे
मणि, मंत्र अने जंत्र तंत्र वगेरे कोईपण मरणथी बचावी
शकतुं नथी.
अहीं एम समजवुं के निज आत्मा ज शरण छे, ते
सिवाय अन्य कोई शरण नथी. कोई जीव बीजा जीवनी रक्षा
करी शकवा समर्थ नथी; माटे परथी रक्षानी आशा नकामी छे.
सर्वत्र-सदाय एक निज आत्मा ज पोतानुं शरण छे. आत्मा
निश्चयथी मरतो ज नथी, केमके ते अनादि-अनंत छे
एम
स्वसन्मुखतापूर्वक चिंतवन करी सम्यग्द्रष्टि जीव वीतरागतानी
वृद्धि करे छे ते अशरण भावना छे. ४.
संसार भावना
चहुंगति दुख जीव भरै हैं, परिवर्तन पंच करै हैं;
सबविधि संसार असारा, यामें सुख नाहिं लगारा. ५.