Chha Dhala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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१५८ ][ छ ढाळा
असुरकुमारअसुर नामनी देवगति नामकर्मना उदयवाळा
भवनवासी देव.
कर्मआत्मा रागादि विकाररूपे परिणमे तो तेमां निमित्तरूपे
होवावाळां जडकर्म-द्रव्यकर्म.
गतिनारक, तिर्यंच, देव अने मनुष्यरूप जीवनी अवस्था
विशेषने गति कहे छे तेमां गति नामे नामकर्म निमित्त
छे.
ग्रैवेयकसोळमा स्वर्गथी उपर अने पहेली अनुदिशथी
नीचेनां देवोने रहेवाना स्थान.
देवदेवगतिने प्राप्त जीवोने देव कहेवाय छे; तेओ अणिमा,
महिमा, लघिमा, गरिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, इशित्व अने
वशित्व
ए आठ सिद्धि (ऐश्वर्य) वाळा होय छे.
जेमने मनुष्यना जेवा आकारवाळुं सात कुधातु रहित
सुंदर शरीर होय छे.
धर्मदुःखथी मुक्ति अपावनार; निश्चयरत्नत्रयस्वरूप
मोक्षमार्ग, जेनाथी आत्मा मोक्ष पामे छे. (रत्नत्रय
एटले सम्यग्दर्शन-ज्ञान-चारित्र).
धर्मना जुदां जुदां लक्षण[१] वस्तुनो स्वभाव ते धर्म,
[२] अहिंसा, [३] उत्तम क्षमादि दस लक्षण,
[४] निश्चयरत्नत्रय.
पापमिथ्यादर्शन, आत्मानी ऊंधी समजण, हिंसादि
अशुभभाव ते पाप छे.