सुखोनी असारता वगेरेनां कारणो बतावो.
सार्थकपणुं, निरर्थकपणुं, बार भावनाओना चिंतवनथी
लाभ, मंत्रादिनुं सार्थकपणुं अने निरर्थकपणुं, वैराग्यनी
वृद्धिनो उपाय, इन्द्रधनुष्य तथा वीजळीनुं द्रष्टांत शुं
समजावे छे? लोकना कर्ता-हर्ता-धर्ता मानवाथी नुकशान,
समता न राखवाथी नुकशान, सांसारिक सुखनुं परिणाम
अने मोक्षसुख प्राप्तिनो वखत वगेरेनुं स्पष्ट वर्णन करो.