Chha Dhala-Gujarati (Devanagari transliteration).

< Previous Page   Next Page >


Page 161 of 205
PDF/HTML Page 183 of 227

 

background image
पांचमी ढाळ ][ १६१
४. अकाम निर्जरानुं निष्प्रयोजन, अचल सुखनी प्राप्ति, कर्मना
आववानो निरोध, पुण्यना त्यागनो उपदेश अने सांसारिक
सुखोनी असारता वगेरेनां कारणो बतावो.
५. अमुक भावनानो विचार अने लाभ, आत्मज्ञाननी
प्राप्तिनो समय अने लाभ, इन्द्रधनुष्य, औषधिसेवननुं
सार्थकपणुं, निरर्थकपणुं, बार भावनाओना चिंतवनथी
लाभ, मंत्रादिनुं सार्थकपणुं अने निरर्थकपणुं, वैराग्यनी
वृद्धिनो उपाय, इन्द्रधनुष्य तथा वीजळीनुं द्रष्टांत शुं
समजावे छे? लोकना कर्ता-हर्ता-धर्ता मानवाथी नुकशान,
समता न राखवाथी नुकशान, सांसारिक सुखनुं परिणाम
अने मोक्षसुख प्राप्तिनो वखत वगेरेनुं स्पष्ट वर्णन करो.
६. अमुक शब्द, चरण अने छंदनो अर्थ अथवा भावार्थ कहो.
लोकनो नकशो बनावो. आ पांचमी ढाळनो सारांश बतावो.