१६० ][ छ ढाळा
स्वभावमां स्थिर रहेनार महाव्रतना धारक दिगम्बर
मुनि ते निश्चयथी सकलव्रती छे.
अंतर-प्रदर्शन
१. अनुप्रेक्षा अने भावना ते पर्यायवाचक शब्दो छे, तेमां कांई
तफावत नथी.
२. धर्मभावनामां तो वारंवार विचारनी मुख्यता छे अने
धर्ममां निजगुणोमां स्थिर थवानी प्रधानता छे.
३. व्यवहार-सकलव्रतमां तो पापोनो सर्वदेश त्याग करवामां
आवे छे अने व्यवहार अणुव्रतमां तेनो एकदेश त्याग
करवामां आवे छे; एटलो ए बन्नेमां तफावत छे.
पांचमी ढाळनी प्रश्नावली
१. अनित्य भावना, अन्यत्व भावना, अविपाक निर्जरा,
अकाम निर्जरा, अशरण भावना, अशुचि भावना, आस्रव
भावना, एकत्व भावना, धर्म भावना, निश्चय धर्म,
बोधिदुर्लभभावना, लोक, लोकभावना, संवर भावना,
सकाम निर्जरा, सविपाक निर्जरा वगेरेनां लक्षण समजावो.
२. सकलव्रतमां अने विकलव्रतमां, अनुप्रेक्षामां अने भावनामां,
धर्ममां अने धर्मद्रव्यमां, धर्ममां अने धर्म भावनामां तथा
एकत्वभावना अने अन्यत्वभावनामां तफावत बतावो.
३. अनुप्रेक्षा, अनित्यता, अन्यत्व अने अशरणपणानुं स्वरूप
द्रष्टांत सहित बतावो.