Chha Dhala-Gujarati (Devanagari transliteration). Gatha: 5 (Dhal 6).

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छठ्ठी ढाळ ][ १७१
प्रश्नगुप्ति कोने कहे छे?
उत्तरमन-वचन-कायानी बाह्य चेष्टा मटाडवा मागे,
पाप चिंतवन न करे, मौन धारे, तथा गमनादि न करे, तेने
अज्ञानी जीव गुप्ति माने छे. हवे मनमां तो भक्ति आदिरूप
अनेक प्रकारना शुभ रागादि विकल्पो थाय छे, एटले प्रवृत्तिमां
तो गुप्तिपणुं बने नहि. (सम्यग्दर्शन-ज्ञान अने आत्मामां
लीनता वडे) वीतरागभाव थतां ज्यां मन-वचन-कायानी चेष्टा
थाय नहि ए ज साची गुप्ति छे.
(मोक्षमार्ग प्र० पृ. २३१-३२)
मुनिओ प्रिय (अनुकूळ) पांच इन्द्रियोना पांच रस, पांच
रूप, बे गंध, आठ स्पर्श अने शब्दरूप पांच विषयोमां राग करता
नथी अने अप्रिय (प्रतिकूळ) उपर कहेलां पांच विषयोमां द्वेष
करता नथी. ए रीते पांच इन्द्रियोने जीतवाना कारणे तेओ
जितेन्द्रिय कहेवाय छे. ४.
मुनिओना छ आवश्यक अने बाकीना
सात मूळगुण
समता सम्हारैं, थुति उचारैं, वंदना जिनदेवको,
नित करैं श्रुतिरति करैं प्रतिक्रम, तजैं तन अहमेवको;
जिनके न न्हौन, न दंतधोवन, लेश अंबर-आवरन,
भूमाहिं पिछली रयनिमें कछु शयन एकासन करन. ५.