खुजलीने (खुजावते) खंजवाळे छे. [जे] (शुभ) प्रिय अने
(असुहावने) अप्रिय [पांच इन्द्रिय संबंधी] (रस) पांच रस,
(रूप) पांच वर्ण, (गंध) बे गंध, (फरस) आठ प्रकारना स्पर्श
(अरु) अने (शब्द) शब्द (तिनमें) ते बधामां (राग-विरोध)
राग के द्वेष (न) मुनिने थतां नथी, [तेथी ते मुनि] (पंचेन्द्रिय
जयन) पांच इन्द्रियोने जीतवावाळां एटले के जितेन्द्रिय (पद
पावने) पदने पामे छे.
करे छे.
छे; अने ते वखते मन-वचन-कायानी क्रिया स्वयं रोकाई जाय
छे; तेमनी शांत अने अचळ मुद्रा जोईने तेमना शरीरने पथ्थर
समजी मृगना टोळा
त्रण गुप्ति छे.
खाई गया पण तेओ पोताना ध्यानथी जरापण चलायमान थया
नहि. (संयोगथी दुःख थतुं ज नथी, शरीरादिमां ममता करे तो
ते ममत्वभावथी ज दुःखनो अनुभव थाय छे---एम समजवुं.)