Chha Dhala-Gujarati (Devanagari transliteration). Gatha: 4 (Dhal 6).

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छठ्ठी ढाळ ][ १६९
संभाळीने राखे छे अने उपाडे छे; तेथी तेओने चोथी आदान-
निक्षेपण समिति होय छे. मळ-मूत्र, कफ वगेरे शरीरना मेलने
जीवरहित स्थान जोईने छोडे छे तेथी तेमने पांचमी व्युत्सर्ग
अर्थात
् प्रतिष्ठापन समिति होय छे. ३.
मुनिओने त्रण गुप्ति अने पांच £न्द्रिय पर विजय
सम्यक् प्रकार निरोध मन-वच-काय, आतम ध्यावते,
तिन सुथिर मुद्रा देखि मृगगण उपल खाज खुजावते;
रस रूप गंध तथा फरस अरु शब्द शुभ असुहावने,
तिनमें न राग-विरोध पंचेन्द्रिय-जयन पद पावने. ४.
अन्वयार्थ[वीतरागी मुनि] (मन वच काय) मन-
वचन-कायाने (सम्यक् प्रकार) भली रीते-बराबर (निरोध)
निरोध करीने, ज्यारे (आतम) पोताना आत्मानुं (ध्यावते)
ध्यान करे छे, त्यारे (तिन) ते मुनिओनी (सुथिर) शांत (मुद्रा)
मुद्रा (देखि) जोईने (उपल) पथ्थर जाणीने (मृगगण) हरण