निक्षेपण समिति होय छे. मळ-मूत्र, कफ वगेरे शरीरना मेलने
जीवरहित स्थान जोईने छोडे छे तेथी तेमने पांचमी व्युत्सर्ग
अर्थात
तिन सुथिर मुद्रा देखि मृगगण उपल खाज खुजावते;
रस रूप गंध तथा फरस अरु शब्द शुभ असुहावने,
तिनमें न राग-विरोध पंचेन्द्रिय-जयन पद पावने. ४.
निरोध करीने, ज्यारे (आतम) पोताना आत्मानुं (ध्यावते)
ध्यान करे छे, त्यारे (तिन) ते मुनिओनी (सुथिर) शांत (मुद्रा)
मुद्रा (देखि) जोईने (उपल) पथ्थर जाणीने (मृगगण) हरण