(कचलोंच) केशलोंच (करत) करे छे. (निज ध्यानमें) पोताना
आत्माना ध्यानमां (लगे) तत्पर थईने (परिषह सों) बावीस
प्रकारना परिषहोथी (न डरत) डरता नथी, अने (अरि मित्र)
शत्रु के मित्र, (महल मसान) महेल के स्मशान, (कंचन कांच)
सोनुं के कांच (निंदन थुति करन) निंदा करनार के स्तुति करनार,
(अर्घावतारन) पूजा करनारा अने (असि-प्रहारन में) तरवारथी
प्रहार करवावाळा ए सर्वमां (सदा) हमेशां (समता) समताभाव
(धरन) धारण करे छे.
केशनो लोच करे छे; आत्मध्यानमां मग्न रही परिषहोथी डरता
नथी, अर्थात
स्तुति करनार, पूजा-भक्ति करनार अथवा तरवार आदिथी