Chha Dhala-Gujarati (Devanagari transliteration).

< Previous Page   Next Page >


Page 174 of 205
PDF/HTML Page 196 of 227

 

background image
१७४ ][ छ ढाळा
हाथमां राखीने (अलप) थोडो (अहार) आहार (लैं) ले छे,
(कचलोंच) केशलोंच (करत) करे छे. (निज ध्यानमें) पोताना
आत्माना ध्यानमां (लगे) तत्पर थईने (परिषह सों) बावीस
प्रकारना परिषहोथी (न डरत) डरता नथी, अने (अरि मित्र)
शत्रु के मित्र, (महल मसान) महेल के स्मशान, (कंचन कांच)
सोनुं के कांच (निंदन थुति करन) निंदा करनार के स्तुति करनार,
(अर्घावतारन) पूजा करनारा अने (असि-प्रहारन में) तरवारथी
प्रहार करवावाळा ए सर्वमां (सदा) हमेशां (समता) समताभाव
(धरन) धारण करे छे.
भावार्थ[ते वीतरागी मुनि] (५) दिवसे एकवार (६)
ऊभा ऊभा पोताना हाथमां राखीने थोडो आहार ले छे, (७)
केशनो लोच करे छे; आत्मध्यानमां मग्न रही परिषहोथी डरता
नथी, अर्थात
् बावीस प्रकारना परिषहो उपर जय मेळवे छे, तथा
शत्रु-मित्र, सुंदर महेल अथवा स्मशान, सोनुं-काच, निंदक अने
स्तुति करनार, पूजा-भक्ति करनार अथवा तरवार आदिथी