Chha Dhala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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छठ्ठी ढाळ ][ १९३
अन्वयार्थ(यह) आ (राग आग) रागरूपी अग्नि
(सदा) अनादिकाळथी हमेशां (दहै) जीवने बाळी रह्यो छे
(तातैं) तेथी (समामृत) समतारूप अमृतनुं (सेईये) सेवन
करवुं जोईए. (विषय-कषाय) विषय-कषायनुं (चिर भजे)
अनादि काळथी सेवन कर्युं छे, (अब तो) हवे तो (त्याग)
तेनो त्याग करीने (निजपद) आत्मस्वरूपने (बेईये) ओळखवुं
जोईए
प्राप्त करवुं जोईए; (पर पदमें) पर पदार्थोमां-
परभावोमां (कहा) केम (रच्यो) राची रह्यो छे? (यहै) ते
(पद) पद (तेरो) तारुं (न) नथी, तुं (दुख) दुःख (क्यों)
केम (सहै) सहन करे छे? (‘दौल’) दौलतराम! (अब) हवे
(स्वपद) तारुं आत्मपद-सिद्धपद तेमां (रचि) लागीने (सुखी)
सुखी (होउ) थाओ! (यहै) आ (दाव) अवसर (मत चूकौ)
गुमावो नहि.
भावार्थआ राग (मोह, अज्ञान) रूप अग्नि