(तातैं) तेथी (समामृत) समतारूप अमृतनुं (सेईये) सेवन
करवुं जोईए. (विषय-कषाय) विषय-कषायनुं (चिर भजे)
अनादि काळथी सेवन कर्युं छे, (अब तो) हवे तो (त्याग)
तेनो त्याग करीने (निजपद) आत्मस्वरूपने (बेईये) ओळखवुं
जोईए
(पद) पद (तेरो) तारुं (न) नथी, तुं (दुख) दुःख (क्यों)
केम (सहै) सहन करे छे? (‘दौल’) दौलतराम! (अब) हवे
(स्वपद) तारुं आत्मपद-सिद्धपद तेमां (रचि) लागीने (सुखी)
सुखी (होउ) थाओ! (यहै) आ (दाव) अवसर (मत चूकौ)
गुमावो नहि.