सुधी सुधार पढो सदा, जो पावो भव-कूल.
मारी अल्पबुद्धि तथा प्रमादथी तेमां क्यांय शब्दनी के अर्थनी
भूल थई गई होय तो बुद्धिमान तेने सुधारीने वांचे, जेथी
करीने जीव आ संसार-समुद्र तरवामां शक्तिमान थाय.
लेवामां आवे छे, पोताना आत्मामां आत्मा माटे, आत्मा वडे
पोताना आत्मानो अनुभव थवा मांडे छे, त्यां नय, प्रमाण,
निक्षेप, गुण-गुणी, ज्ञान-ज्ञाता-ज्ञेय, ध्यान-ध्याता-ध्येय, कर्ता-कर्म
अने क्रिया आदि भेदनो जरापण विकल्प रहेतो नथी, शुद्ध
उपयोगरूप अभेद रत्नत्रयवडे शुद्ध चैतन्यनो ज अनुभव थवा
मांडे छे तेने स्वरूपाचरण चारित्र कहे छे; आ स्वरूपाचरण
तीक्ष्ण शस्त्रोना प्रहारने रोकनार ढाल होय छे तेम जीवने
अहितकारी शत्रु
ग्रंथनुं नाम ‘छ ढाळा’ राखवामां आवेल छे.