Chha Dhala-Gujarati (Devanagari transliteration). Chhathi Dhalano Saransh.

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छठ्ठी ढाळ ][ १९५
लघु-धी तथा प्रमादतैं, शब्द-अर्थकी भूल;
सुधी सुधार पढो सदा, जो पावो भव-कूल.
भावार्थमें दौलतरामे पंडित बुधजनकृत *छ ढाळानी
कथनीनो आधार लईने विक्रम संवत् १८९१ना वैशाख सुद
३ (अक्षयत्रीज)ना दिवसे आ छ ढाळा ग्रंथनी रचना करी छे.
मारी अल्पबुद्धि तथा प्रमादथी तेमां क्यांय शब्दनी के अर्थनी
भूल थई गई होय तो बुद्धिमान तेने सुधारीने वांचे, जेथी
करीने जीव आ संसार-समुद्र तरवामां शक्तिमान थाय.
छÕी ढाळनो सारांश
जे चारित्रना होवाथी समस्त पर पदार्थोथी प्रवृत्ति हठी
जाय छे, वर्णादि अने रागादिथी चैतन्यभावने जुदो करी
लेवामां आवे छे, पोताना आत्मामां आत्मा माटे, आत्मा वडे
पोताना आत्मानो अनुभव थवा मांडे छे, त्यां नय, प्रमाण,
निक्षेप, गुण-गुणी, ज्ञान-ज्ञाता-ज्ञेय, ध्यान-ध्याता-ध्येय, कर्ता-कर्म
अने क्रिया आदि भेदनो जरापण विकल्प रहेतो नथी, शुद्ध
उपयोगरूप अभेद रत्नत्रयवडे शुद्ध चैतन्यनो ज अनुभव थवा
मांडे छे तेने स्वरूपाचरण चारित्र कहे छे; आ स्वरूपाचरण
*आ ग्रंथमां छ प्रकारना छंद अने छ प्रकरण छे तेथी, तथा जेम
तीक्ष्ण शस्त्रोना प्रहारने रोकनार ढाल होय छे तेम जीवने
अहितकारी शत्रु
मिथ्यात्व रागादि आस्रवोने तथा अज्ञान
अंधकारने रोकवा माटे ढाल समान आ छ प्रकरण छे तेथी, आ
ग्रंथनुं नाम ‘छ ढाळा’ राखवामां आवेल छे.