Chha Dhala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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१९८ ][ छ ढाळा
सिद्ध परमात्माना गुणसर्वे गुणोमां संपूर्ण शुद्धता प्रगट
थतां सर्व प्रकारे अशुद्ध पर्यायोनो नाश थतां,
ज्ञानावरणादि आठे कर्मनो स्वयं सर्वथा नाश थाय छे
अने गुण प्रगटता नथी, पण गुणना निर्मळ पर्यायो
प्रगट थाय छे; जेमके अनंतदर्शन-ज्ञान-सम्यक्त्व-सुख
अने अनंतवीर्य, अटल अवगाहना, अमूर्तिक
(सूक्ष्मत्व) अने अगुरुलघुत्व
ए आठ गुण
व्यवहारथी कह्या छे, निश्चयथी तो दरेक सिद्ध
भगवंतोने अनंत गुण समजवा.
शीलअचेतन स्त्री त्रण (कठोर स्पर्श, कोमल स्पर्श, चित्रपट)
प्रकारनी ते साथे त्रण करण (करण, करावण अने
अनुमोदन)थी, बे (मन, वचन) योग द्वारा, पांच
इन्द्रिय (कर्ण, चक्षु, नासिका, जीभ, स्पर्श)थी, चार
संज्ञा (आहार, भय, मैथुन, परिग्रह) सहित द्रव्यथी
अने भावथी सेवन
×××××२=७२० भेद
थया.
चेतन स्त्री(देवी, मनुष्य, तिर्यंच) त्रण प्रकारनी ते साथे त्रण
करण (करण, करावण अने अनुमोदन)थी, त्रण (मन,
वचन, कायारूप) योग द्वारा, पांच (कर्ण, चक्षु, नासिका,
जीभ, स्पर्शरूप) इन्द्रियथी, चार (आहार, भय, मैथुन,
परिग्रह) संज्ञा सहित द्रव्यथी अने भावथी, सोळ
(अनंतानुबंधी, अप्रत्याख्यानावरणीय, प्रत्याख्याना-