Chha Dhala-Gujarati (Devanagari transliteration). Chhathi Dhalano Bhed-sangrah.

< Previous Page   Next Page >


Page 197 of 205
PDF/HTML Page 219 of 227

 

background image
छठ्ठी ढाळ ][ १९७
छÕी ढाळनो भेद-संग्रह
अंतरंगतपना नामप्रायश्चित, विनय, वैयावृत्य, स्वाध्याय,
व्युत्सर्ग अने ध्यान.
उपयोगशुद्धउपयोग, शुभउपयोग अने अशुभउपयोग
ए त्रण छे. ए चारित्र गुणनी अवस्था छे (तथा
जाणवुं-देखवुं ते ज्ञान-दर्शन गुणनो उपयोग छे, ते
वात अहीं नथी).
छेंतालीश दोषदाताने आश्रये सोळ उद्गम दोष, पात्रने
आश्रये सोळ उत्पादन दोष तथा आहार संबंधी दश
दोष अने भोजनक्रिया संबंधी ४ दोष
एम कुल
छेंतालीश दोष छे.
त्रण रत्नसम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान अने सम्यक्चारित्र.
तेर प्रकारनुं चारित्रपांच महाव्रत, पांच समिति अने त्रण
गुप्ति.
धर्मउत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, सत्य, शौच, संयम, तप,
त्याग, आकिंचन्य अने ब्रह्मचर्यए दस प्रकार छे.
[दशे धर्मने उत्तम संज्ञा छे तेथी निश्चयसम्यग्दर्शनपूर्वक
वीतरागभावना ज ए दश प्रकार छे.]
मुनिनी क्रिया (मुनिना गुण)मूळगुण २८ छे.
रत्नत्रयनिश्चय अने व्यवहार अथवा मुख्य अने
उपचारए बे प्रकार छे.