Chha Dhala-Gujarati (Devanagari transliteration).

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२०० ][ छ ढाळा
रीते आत्मभानपूर्वक रोकवी अर्थात् आत्मामां ज
लीनता थवी ते गुप्ति छे.
तपस्वरूपविश्रांत, निस्तरंगपणे निज शुद्धतामां प्रतापवंत
होवुं-शोभवुं ते. तेमां जेटली शुभाशुभ इच्छाओ
रोकाई जाय छे अने शुद्धता थाय छे ते तप छे.
(अन्य बार प्रकार तो व्यवहार (उपचार) तपना भेद
छे.)
ध्यानसर्व विकल्पो छोडीने पोताना ज्ञानने लक्ष्यमां स्थिर
करवुं.
नयवस्तुना एक अंशने मुख्य करीने जाणे ते नय छे अने
ते उपयोगात्मक छे-सम्यक् श्रुतज्ञानप्रमाणनो अंश ते
नय छे.
निक्षेपनयज्ञान द्वारा बाधारहितपणे प्रसंगवशात् पदार्थमां
नामादिनी स्थापना करवी ते.
परिग्रहपरवस्तुमां ममताभाव (मोह अथवा ममत्व).
परिषहजयदुःखना कारणो मळतां दुःखी न थाय तथा
सुखना कारणो मळतां सुखी न थाय पण ज्ञाता तरीके
ते ज्ञेयनो जाणवावाळो ज रहे ए ज साचो परिषहजय
छे.
(मोक्षमार्ग प्र पृ. २३२)
प्रतिक्रमणमिथ्यादर्शन, मिथ्याज्ञान, मिथ्याचारित्रने
निरवशेषपणे छोडीने सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान, सम्यक्-