Moksha Marg Prakashak-Gujarati (Devanagari transliteration).

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ए प्रमाणे जैनमां श्वेतांबरमत छे, ते पण देवादिक, तत्त्वादिक अने मोक्षमार्गादिकनुं
अन्यथा निरूपण करे छे, माटे ते पण मिथ्यादर्शनादिकना पोषक छे, तेथी त्याज्य छे.
जैनधर्मनुं सत्यस्वरूप आगळ कहीशुं, जे वडे मोक्षमार्गमां प्रवर्तवुं योग्य छे. तेमां
प्रवर्तवाथी तमारुं कल्याण थशे.
ए प्रमाणे श्री मोक्षमार्गप्रकाशक शास्त्रविषे अन्यमत निरूपक
पांचमो अधिकार समाप्त
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