Moksha Marg Prakashak-Gujarati (Devanagari transliteration).

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आठमो अधिकार ][ ३०९
बीजुं, प्रथमानुयोगादिनो अभ्यास करवो कह्यो त्यां पहेलां आनो अभ्यास करवो पछी
आनो अभ्यास करवो, एवो कोई नियम नथी, पण पोताना परिणामोनी अवस्था जोई जेना
अभ्यासथी पोताने धर्ममां प्रवृत्ति थाय तेनो ज अभ्यास करवो. अथवा कोई वखत कोई
शास्त्रनो तथा कोई वखत कोई शास्त्रनो अभ्यास करवो. वळी जेम रोजनामामां तो अनेक रकमो
ज्यां
त्यां लखी छे तेनी ते ते खातामां बराबर खतवणी करे तो लेणादेणानो निश्चय थाय;
तेम शास्त्रमां तो अनेक प्रकारनो उपदेश ज्यांत्यां आप्यो छे पण तेने सम्यग्ज्ञानमां यथार्थ
प्रयोजनपूर्वक ओळखे तो हितअहितनो निश्चय थाय.
माटे स्यात्पदनी सापेक्षतासहित सम्यग्ज्ञानवडे जे जीव जिनवचनमां रमे छे ते जीव
थोडा ज वखतमां शुद्ध आत्मस्वरूपने प्राप्त थाय छे. मोक्षमार्गमां प्रथम उपाय आगमज्ञान
कह्यो छे, आगमज्ञान विना धर्मनुं साधन थई शके नहि, माटे तमारे पण यथार्थ बुद्धिवडे
आगमनो अभ्यास करवो, एथी तमारुं कल्याण थशे.
ए प्रमाणे श्री मोक्षमार्गप्रकाशक शास्त्रमां उपदेशनुं स्वरूप
प्रतिपादन करवावाळो आठमो अधिकार समाप्त