Moksha Marg Prakashak-Gujarati (Devanagari transliteration).

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३०८ ][ मोक्षमार्गप्रकाशक
होय तो कांई दोष नथी, परंतु जो कोई ठेकाणे कोई प्रयोजन तथा कोई ठेकाणे कोई
प्रयोजन पोषे तो त्यां दोष ज छे. हवे
जिनमतमां तो रागादिक मटाडवानुं एक प्रयोजन
छे तेथी तेमां कोई ठेकाणे सर्वरागादि छोडावी अल्परागादि कराववानुं प्रयोजन पोष्युं छे
तथा कोई ठेकाणे सर्वरागादि छोडाववानुं प्रयोजन पोष्युं छे, परंतु रागादि वधारवानुं प्रयोजन
कोई पण ठेकाणे नथी माटे जिनमतनां सर्व कथन निर्दोष छे. तथा अन्यमतमां कोई ठेकाणे
रागादि मटाडवाना प्रयोजनसहित कथन करे छे त्यारे कोई ठेकाणे रागादि वधारवाना
प्रयोजनसहित कथन करे छे, ए ज प्रमाणे अन्य पण प्रयोजननी विरुद्धतापूर्वक कथन करे छे,
तेथी अन्यमतनां कथन सदोष छे. लोकमां पण एक ज प्रयोजनने पोषतां जुदां जुदां वचन
कहे तेने प्रामाणिक कहीए छीए, पण जे अन्य अन्य प्रयोजन पोषती वात करे तेने मूर्ख
कहीए छीए.
बीजुं, जिनमतमां नानाप्रकारनां कथन करे छे ते जुदी जुदी अपेक्षासहित छे, त्यां
दोष नथी पण अन्यमतमां एक ज अपेक्षापूर्वक अन्य अन्य कथन करे छे त्यां दोष छे. जेम
के
‘जिनदेवने वीतरागभाव छे तथा समवसरणादि विभूति पण होय छे’ त्यां विरोध नथी;
कारण केसमवसरणादि विभूतिनी रचना इंद्रादिक करे छे अने तीर्थंकरने तेमां रागादिक नथी
तेथी ए बंने वातो तो संभवे छे, पण अन्यमतमां ईश्वरने साक्षीभूतवीतराग पण कहे छे
तथा तेना ज वडे करेला कामक्रोधादिभाव निरूपण करे छे; हवे एक आत्माने वीतरागपणुं
तथा कामक्रोधादिभाव केम संभवे? ए ज प्रमाणे अन्य पण समजवुं.
काळदोषथी जिनमतमां एक ज प्रकारे कोई कथन विरुद्ध लख्यां छे ते तो तुच्छ-
बुद्धिवानोनी भूल छे, कांई मतमां दोष नथी. त्यां पण जिनमतनो एटलो तो अतिशय छे
के
प्रमाणविरुद्ध कथन कोई करी शके नहि. श्री नेमिनाथस्वामीनो जन्म कोई ठेकाणे सौरीपुरमां
तथा कोई ठेकाणे द्वारावतीमां लख्यो छे ते गमे त्यां थयो होय पण नगरमां जन्म होवो
प्रमाणविरुद्ध नथी, आज पण थतो देखाय छे. बीजुंः
अन्यमतमां सर्वज्ञादि यथार्थ ज्ञानीना करेला ग्रंथ बतावे छे, तेमां परस्पर विरुद्धता
भासे छे. त्यां कोई ठेकाणे तो बाळब्रह्मचारीनी प्रशंसा करे छे त्यारे कोई ठेकाणे कहे छे के
‘पुत्र विना गति थाय नहि.’ हवे ए बंने विरुद्ध कथन साचां केम होय? एवां कथन त्यां
घणां जोवामां आवे छे. वळी प्रमाण विरुद्ध कथन पण तेमां होय छे. जेम के
‘मुखमां वीर्य
पडवाथी माछलीने पुत्र थयो.’ हवे आ काळमां पण एम थतुं कोईने देखातुं नथी अने
अनुमानथी पण ए मळतुं नथी; एवां कथन पण तेमां घणां जोवामां आवे छे. अहीं कदाचित्
सर्वज्ञादिकनी भूल मानीए पण ते केम भूले? अने विरुद्ध कथन मानवामां पण आवे नहि,
माटे तेमना मतमां दोष ठरावीए छीए. एम जाणी एक जिनमतनो ज उपदेश ग्रहण करवा
योग्य छे.