Niyamsar-Gujarati (Devanagari transliteration). Shlok: 98-99.

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कहानजैनशास्त्रमाळा ]
व्यवहारचारित्र अधिकार
[ १३७
(मालिनी)
जितरतिपतिचापः सर्वविद्याप्रदीपः
परिणतसुखरूपः पापकीनाशरूपः
हतभवपरितापः श्रीपदानम्रभूपः
स जयति जितकोपः प्रह्वविद्वत्कलापः
।।9।।
(मालिनी)
जयति विदितमोक्षः पद्मपत्रायताक्षः
प्रजितदुरितकक्षः प्रास्तकंदर्पपक्षः
पदयुगनतयक्षः तत्त्वविज्ञानदक्षः
कृतबुधजनशिक्षः प्रोक्त निर्वाणदीक्षः
।।9 9।।

पुण्यरूपी कमळने (विकसाववा) माटे भानु छे, जेओ सर्व गुणोना समाज (समुदाय) छे, जेओ सर्व कल्पित (चिंतित) देनार कल्पवृक्ष छे, जेमणे दुष्ट कर्मना बीजने नष्ट कर्युं छे, जेमनां चरणमां सुरेंद्रो नमे छे अने जेमणे संसाररूपी वृक्षनो त्याग कर्यो छे, ते जिनराज (श्री पद्मप्रभ भगवान) जयवंत छे. ९७.

[श्लोकार्थः] कामदेवनां बाणने जेमणे जीती लीधां छे, सर्व विद्याओना जेओ प्रदीप (प्रकाशक) छे, सुखरूपे जेमनुं स्वरूप परिणम्युं छे, पापने (मारी नाखवा) माटे जेओ यमरूप छे, भवना परितापनो जेमणे नाश कर्यो छे, भूपतिओ जेमना श्रीपदमां (महिमायुक्त पुनित चरणोमां) नमे छे, क्रोधने जेमणे जीत्यो छे अने विद्वानोनो समुदाय जेमनी आगळ ढळी पडे छे, ते (श्री पद्मप्रभनाथ) जयवंत छे. ९८.

[श्लोकार्थः] प्रसिद्ध जेमनो मोक्ष छे, पद्मपत्र (कमळनां पान) जेवां दीर्घ जेमनां नेत्र छे, *पापकक्षाने जेमणे जीती लीधी छे, कामदेवना पक्षनो जेमणे नाश कर्यो छे, यक्ष जेमना चरणयुगलमां नमे छे, तत्त्वविज्ञानमां जेओ दक्ष (चतुर) छे, बुधजनोने जेमणे शिक्षा (शिखामण) आपी छे अने निर्वाणदीक्षा जेओ उच्चर्या छे, ते (श्री पद्मप्रभ जिनेन्द्र) जयवंत छे. ९९.

*कक्षा = भूमिका; श्रेणी; स्थिति; पडखुं.