Parmatma Prakash (Gujarati Hindi) (English transliteration).

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adhikAr-2 dohA-178-181 ]paramAtmaprakAsha [ 505
जीर्णेन वस्त्रेण तथा बुधः देहं न मन्यते जीर्णम्
देहेन जीर्णेन ज्ञानी तथा आत्मानं न मन्यते जीर्णम् ।।१७९।।
वस्त्रे प्रणष्टे यथा बुधः देहं न मन्यते नष्टम्
नष्टे देहे ज्ञानी तथा आत्मानं न मन्यते नष्टम् ।।१८०।।
भिन्नं वस्त्रमेव यथा जीव देहात् मन्यते ज्ञानी
देहमपि भिन्नं ज्ञानी तथा आत्मनः मन्यते जानीहि ।।१८१।।
यथा कोऽपि व्यवहारज्ञानी रक्ते वस्त्रे जीर्णे वस्त्रे नष्टेऽपि स्वकीयवस्त्रे स्वकीयं
देहं रक्तं जीर्णं नष्टं न मन्यते तथा वीतरागनिर्विकल्पस्वसंवेदनज्ञानी देहे रक्ते जीर्णे
नष्टेऽपि सति व्यवहारेण देहस्थमपि वीतरागचिदानन्दैकपरमात्मानं शुद्धनिश्चयनयेन देहाद्भिन्नं
bhAvArthajevI rIte koIpaN vyavahAragnAnI (vyavahAramAn kushaL manuShya) svakIy
vastra lAl hotAn, vastra jIrNa thatAn, ane vastra naShTa thatAn, svakIy dehane lAl, jIrNa ane
naShTa mAnato nathI tevI rIte vItarAg nirvikalpa svasamvedanavALo gnAnI deh lAl hotAn, deh
jIrNa ane naShTa thatAn, vyavahArathI dehamAn rahevA chhatAn paN shuddha nishchayanayathI dehathI bhinna,
ek (kevaL) vItarAg chidAnandamay paramAtmAne lAl, jIrNa ke naShTa mAnato nathI.
[देहं रक्तम् ] शरीरको लाल [न मन्यते ] नहीं मानता, [तथा ] उसी तरह [ज्ञानी ] वीतराग
निर्विकल्प स्वसंवेदनज्ञानी [देह रक्ते ] शरीरके लाल होनेसे [आत्मानं ] आत्माको [रक्तम्
न मन्यते ] लाल नहीं मानता
[यथा बुधः ] जैसे कोई बुद्धिमान् [वस्त्रे जीर्णे ] कपड़ेके
जीर्ण (पुराने ) होने पर [देहं जीर्णम् ] शरीरको जीर्ण [न मन्यते ] नहीं मानता, [तथा ज्ञानी ]
उसी तरह ज्ञानी [देहे जीर्णे ] शरीरके जीर्ण होनेसे [आत्मानं जीर्णम् न मन्यते ] आत्माको
जीर्ण नहीं मानता, [यथा बुधः ] जैसे कोई बुद्धिमान् [वस्त्रे प्रणष्टे ] वस्त्रके नाश होनेसे [देहं
नष्टम् ] देहका नाश [न मन्यते ] नहीं मानता, [तथा ज्ञानी ] उसी तरह ज्ञानी [देहे नष्टे ]
देहका नाश होनेसे [आत्मानं ] आत्माका [नष्टम् न मन्यते ] नाश नहीं मानता, [जीव ] हे
जीव, [यथा ज्ञानी ] जैसे ज्ञानी [देहाद् भिन्नं एव ] देहसे भिन्न ही [वस्त्रम् मन्यते ] कपड़ेको
मानता है, [तथा ज्ञानी ] उसी तरह ज्ञानी [देहमपि ] शरीरको भी [आत्मनः भिन्नं ] आत्मासे
जुदा [मन्यते ] मानता है, ऐसा [जानीहि ] तुम जानो
भावार्थ :जैसे वस्त्र और शरीर मिले हुए भासते हैं, परंतु शरीरसे वस्त्र जुदा है, उसी
तरह आत्मा और शरीर मिले हुए दिखते हैं, परंतु जुदा हैं शरीरकी रक्ततासे, जीर्णतासे और
विनाशसे आत्माकी रक्तता, जीर्णता और विनाश नहीं होता यह निसंदेह जानो यह आत्मा