Parmatma Prakash (Gujarati Hindi) (English transliteration).

< Previous Page   Next Page >


Page 525 of 565
PDF/HTML Page 539 of 579

 

background image
adhikAr-2 dohA-194 ]paramAtmaprakAsha [ 525
यावत् शुभाशुभभावाः नैव सकला अपि त्रुटयन्ति
परमसमाधिर्न तावत् मनसि केवलिन एवं भणन्ति ।।१९४।।
जामु इत्यादि जामु यावत्कालं णवि तुट्टंति नैव नश्यन्ति के कर्तारः सुहासुह-भावडा
शुभाशुभविकल्पजालरहितात् परमात्मद्रव्याद्विपरीताः शुभाशुभभावाः परिणामा कतिसंख्योपेता
अपि सयल वि समस्ता अपि तामु ण तावत्कालं न कोऽसौ परम-समाहि
शुद्धात्मसम्यक्श्रद्धानज्ञानानुचरणरूपः शुद्धोपयोगलक्षणः परमसमाधिः क्व मणि रागादि-
विकल्पत्वेन शुद्धचेतसि केवलि एहु भणंति केवलिनो वीतरागसर्वज्ञा एवं कथयन्तीति
भावार्थः
।।१९४।। इति चतुर्विंशतिसूत्रप्रमितमहास्थलमध्ये परमसमाधिप्रतिपादकसूत्रषट्केन
प्रथममन्तरस्थलं गतम्
bhAvArthajyAn sudhI shubhAshubh vikalpajALarahit evA paramAtmadravyathI viparIt
samasta shubhAshubh pariNAmo nAsh pAmatA nathI, tyAn sudhI rAgAdi vikalpathI rahit evA shuddha
chittamAn shuddha AtmAnAn samyakshraddhAn, samyaggnAn ane samyaganucharaNarUp
shuddhopayogalakShaNavALI param samAdhi thatI nathI em kevaLI vItarAg sarvagna kahe chhe, evo
bhAvArtha chhe. 194.
e pramANe chovIs sUtronA mahAsthaLamAn paramasamAdhinA pratipAdak chha sUtrothI pratham
antarasthaL samApta thayun.
गाथा१९४
अन्वयार्थ :[यावत् ] जब तक [सकला अपि ] समस्त [शुभाशुभभावाः ] सकल
विकल्पजालसे रहित जो परमात्मा उससे विपरीत शुभाशुभ परिणाम [नैव त्रुटयंति ] दूर न
होंमिटें नहीं, [तावत् ] तब तक [मनसि ] रागादि विकल्प रहित शुद्ध चित्तमें [परमसमाधिः
न ] सम्यग्दर्शन ज्ञान चारित्ररूप शुद्धोपयोग जिसका लक्षण है, ऐसी परमसमाधि इस जीवके
नहीं हो सकती [एवं ] ऐसा [केवलिनः ] केवलीभगवान् [भणंति ] कहते हैं
भावार्थ :शुभाशुभ विकल्प जब मिटें, तभी परमसमाधि होवे, ऐसी जिनेश्वरदेवकी
आज्ञा है ।।१९४।।
इसप्रकार चौबीस दोहोंके महास्थलमें परमसमाधिके कथनरूप छह दोहोंका
अंतरस्थल समाप्त हुआ