Parmatma Prakash (Gujarati Hindi) (English transliteration).

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adhikAr-2 dohA-200 ]paramAtmaprakAsha [ 533
भणंति कथयन्ति के ते मुणि मुनयः प्रत्यक्षज्ञानिनः कथंभूतं भणन्ति परमपयास
परमप्रकाशः यः कथंभूतः जो परमप्पउ यः परमात्मा पुनरपि कथंभूतः परम-पउ
परमानन्तज्ञानादिगुणाधारत्वेन परमपदस्वभावः किंविशिष्टः हरि हरिसंज्ञः हरु महेश्वराभिधानः
बंभु वि परमब्रह्माभिधानोऽपि बुद्धु बुद्धः सुगतसंज्ञः सो जिण-देउ स एव पूर्वोक्त : परमात्मा
जिनदेवः
किंविशिष्टः विसुद्धु समस्तरागादिदोषपरिहारेण शुद्ध इति अत्र य एव परमात्मसंज्ञो
निर्दोषिपरमात्मा व्याख्यातः स एव परमात्मा, स एव परमपदः, स एव विष्णुसंज्ञः, स
एवेश्वराभिधानः, स एव ब्रह्मशब्दवाच्यः, स एव सुगतशब्दाभिधेयः, स एव जिनेश्वरः, स एव
विशुद्ध इत्याद्यष्टाधिकसहस्रनामाभिधेयो भवति
नानारुचीनां जनानां तु कस्यापि केनापि
विवक्षितेन नाम्नाराध्यः स्यादिति भावार्थः तथा चोक्त म्‘‘नामाष्टकसहस्रेण युक्तं
vistAr:je paramaprakAsh nAmano paramAtmA chhe te ja paramAtmA, gnAnAdi anant
guNonA AdhAr hovAthI paramapadasvabhAv hari, maheshvar nAmano har, paramabrahma nAmano brahmA,
sugat nAmano buddha, samasta rAgAdi doShanA tyAg vaDe shuddha jinadev chhe em munio
pratyakSha
gnAnIokahe chhe.
bhAvArthaahIn paramAtmaprakAsh nAmanA je nirdoSh paramAtmAnun vyAkhyAn karyun chhe, te
ja paramAtmA chhe, te ja paramapad chhe, tenun nAm ja viShNu chhe, tenun nAm ja maheshvar chhe, te ja
‘brahma’ shabdathI vAchya chhe, te ja ‘sugat’ shabdathI abhidhey chhe, te ja jineshvar chhe, te ja vishuddha
chhe ityAdi ek hajAr ATh nAmavALA chhe em pratyakSha gnAnIo kahe chhe.
judI judI ruchivALA jIvone te koI ek vivakShit nAmathI ArAdhya chhe, evo bhAvArtha
chhe. kahyun paN chhe ke ‘‘नामाष्टकसहस्रेण युक्तं मोक्षपुरेश्वरम्’’ इत्यादि (arthaek hajAr ATh
परमप्रकाश नामसे कहते हैं, [सः ] वह [विशुद्धः जिनदेवः ] रागादि रहित शुद्ध जिनदेव ही
है, उसीके ये सब नाम हैं
।।
भावार्थ :प्रत्यक्षज्ञानी उसे परमानंद ज्ञानादि गुणोंका आधार होनेसे परमपद कहते
हैं वही विष्णु है, वही महादेव है, उसीका नाम परब्रह्म है, सबका ज्ञायक होनेसे बुद्ध है,
सबमें व्यापक ऐसा जिनदेव देवाधिदेव परमात्मा अनेक नामोंसे गाया जाता है समस्त रागादिक
दोषके न होनेसे निर्मल है, ऐसा जो अरहंतदेव वही परमात्म परमपद, वही विष्णु, वही ईश्वर,
वही ब्रह्म, वही शिव, वही सुगत, वही जिनेश्वर, और वही विशुद्ध
इत्यादि एक हजार आठ
नामोंसे गाया जाता है नाना रुचिके धारक ये संसारी जीव वे नाना प्रकारके नामोंसे जिनराजको
आराधते हैं ये नाम जिनराजके सिवाय दूसरेके नहीं हैं ऐसा ही दूसरे ग्रंथोंमें भी कहा है